मेरठ में खिलाड़ियों से बोले डॉ. मोहन भागवत, खेलों को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

मेरठ में खिलाड़ियों से बोले डॉ. मोहन भागवत, खेलों को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

मेरठ में संघ का खिलाड़ी संवाद: डॉ. मोहन भागवत बोले—देश का नाम बड़ा करना ही लक्ष्य

खिलाड़ियों से सीधा संवाद, संगठन और व्यक्तित्व निर्माण पर जोर

मेरठ में द्वारा मेरठ व ब्रज प्रांत के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ विशेष संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संघ के सरसंघचालक मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य अपना नाम आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि देश का नाम ऊंचा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ को समझने के लिए उसे भीतर से जानना आवश्यक है, क्योंकि संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बना है।

डॉ. भागवत ने कहा कि संघ का मूल कार्य व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से समाज का संगठन करना है। उन्होंने बताया कि देशभर के 45 प्रांतों में एक लाख तीस हजार से अधिक सेवा प्रकल्प संचालित हो रहे हैं, जो समाज के सहयोग से चलते हैं।

भारत सांस्कृतिक राष्ट्र, विविधता में एकता हमारी पहचान

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं से परिभाषित राष्ट्र नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक राष्ट्र है। यहां पूजा पद्धति, भाषा और परंपराओं में विविधता हो सकती है, लेकिन एकता की भावना भारतीय संस्कृति का आधार है। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज की एकता कमजोर हुई, तब-तब देश संकट में पड़ा। इसलिए समाज के संगठन और नैतिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि संघ समाज जीवन के लगभग हर क्षेत्र में सकारात्मक कार्य कर रहा है और स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

खेलों के विकास, पारदर्शिता और युवाओं को नशामुक्त करने पर चर्चा

संवाद सत्र में खिलाड़ियों ने पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने, ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर देने, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और खेल अधोसंरचना के विकास जैसे मुद्दे उठाए। इस पर डॉ. भागवत ने कहा कि खेलों को जनआंदोलन बनाना होगा। स्थानीय स्तर पर खेल जगत से जुड़े लोगों को मिलकर रोडमैप तैयार करना चाहिए, जिसमें निष्पक्ष चयन और विकेंद्रीकृत व्यवस्था सुनिश्चित हो।

युवाओं में बढ़ते नशे पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार, शिक्षा और समाज में संस्कारों को मजबूत करना जरूरी है। नैतिक शिक्षा, संवाद और सकारात्मक वातावरण से ही युवाओं को सही दिशा दी जा सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर दीपचंद अहलावत ने की। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, टीम भावना और साहस विकसित करने का सशक्त माध्यम है। अंत में आयोजकों ने सभी खिलाड़ियों का आभार व्यक्त किया।

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Comments

  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram