सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ में सूचना साक्षरता पर व्याख्यान, फेक न्यूज से बचने के बताए तरीके

सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ में सूचना साक्षरता पर व्याख्यान, फेक न्यूज से बचने के बताए तरीके

सुभारती विश्वविद्यालय में गूंजा ‘सूचना साक्षरता’ का मंत्र, डिजिटल युग की चुनौतियों पर हुआ मंथन

मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में “इंफॉर्मेशन लिटरेसी इन द एज ऑफ मिस इंफॉर्मेशन एंड डिजिटल ओवरलोड” विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल युग की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराया। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात विद्वान प्रो. डॉ. एम. मधुसूदन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत संकायाध्यक्ष डॉ. सुधीर त्यागी द्वारा मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में सूचना साक्षरता केवल एक अकादमिक विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन की एक अनिवार्य क्षमता बन चुकी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच सही जानकारी की पहचान करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गया है।

डिजिटल युग में सूचना साक्षरता क्यों है जरूरी?

डॉ. त्यागी ने कहा कि आज की पीढ़ी सूचना के महासागर में जी रही है, जहां हर सेकंड नई जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में यह समझना बेहद आवश्यक है कि कौन-सी जानकारी विश्वसनीय है और कौन-सी भ्रामक। उन्होंने बताया कि सूचना साक्षरता छात्रों को न केवल जानकारी प्राप्त करने, बल्कि उसे समझने, विश्लेषण करने और सही तरीके से उपयोग करने की क्षमता प्रदान करती है।

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फेक न्यूज और डिजिटल ओवरलोड बना बड़ी चुनौती

मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. एम. मधुसूदन ने अपने व्याख्यान में विस्तार से बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सूचनाओं का विस्फोट हो चुका है। उन्होंने कहा कि “आज सबसे बड़ी चुनौती सही और गलत जानकारी के बीच अंतर करना है। सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज समाज को गुमराह कर रही है और इससे सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित हो रहा है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि सूचना साक्षरता का मतलब केवल जानकारी हासिल करना नहीं है, बल्कि उसकी सत्यता की जांच करना और उसे सही संदर्भ में समझना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न डिजिटल टूल्स और फैक्ट-चेकिंग तकनीकों के बारे में जानकारी दी, जिससे वे किसी भी खबर या सूचना की प्रमाणिकता को जांच सकें।

लाइब्रेरी साइंस छात्रों की अहम भूमिका

प्रो. मधुसूदन ने विशेष रूप से लाइब्रेरी साइंस के विद्यार्थियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थी समाज में सूचना के संरक्षक और मार्गदर्शक होते हैं। उनका कार्य केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे डिजिटल युग में सही सूचना को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी को समझें और समाज में जागरूकता फैलाने का काम करें। सही जानकारी का प्रसार और गलत जानकारी का खंडन ही एक स्वस्थ समाज की नींव रख सकता है।

विद्यार्थियों ने दिखाई सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और विभिन्न सवालों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं सामने रखीं। डॉ. मधुसूदन ने सभी प्रश्नों का विस्तार से और सहज भाषा में उत्तर दिया, जिससे छात्रों को विषय को समझने में काफी मदद मिली।

कार्यक्रम का समापन आभार के साथ

अंत में डॉ. सपना शर्मा ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्याख्यान न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप भी था। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर डॉ. जावेद खान, डॉ. अल्पना, श्रीमती भावना जोशी सहित विभाग के कई शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने इस सत्र को अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक बताया।

कुल मिलाकर, सुभारती विश्वविद्यालय का यह व्याख्यान डिजिटल युग में सूचना साक्षरता के महत्व को रेखांकित करने में सफल रहा। आज जब हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन है और सूचनाओं की भरमार है, तब सही और गलत के बीच फर्क करना ही असली ज्ञान है। ऐसे में इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम समाज को जागरूक और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहे हैं।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram