CBSE Result 2026 Controversy: OSM सिस्टम से कॉपी जांच पर बवाल

CBSE Result 2026 Controversy: OSM सिस्टम से कॉपी जांच पर बवाल

CBSE Result 2026 Controversy: OSM सिस्टम से कॉपी जांच पर देशभर में हंगामा, छात्रों ने कहा- “मेहनत हमारी, नुकसान तकनीकी गलती का”

री-इवैल्यूएशन वेबसाइट भी हुई ठप, हजारों छात्र आवेदन तक नहीं कर पाए

Central Board of Secondary Education के 2026 बोर्ड रिजल्ट इस बार केवल अंकों की वजह से चर्चा में नहीं हैं, बल्कि कॉपी जांच के नए डिजिटल सिस्टम “OSM” को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 12वीं के हजारों छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि CBSE ने बिना पूरी तैयारी के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू कर दिया, जिसकी वजह से कॉपियां सही तरीके से स्कैन नहीं हो पाईं और छात्रों को उनकी मेहनत के मुताबिक नंबर नहीं मिले।

रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कई छात्रों ने दावा किया कि जिन विषयों में उन्हें 90 प्रतिशत से अधिक नंबर आने की उम्मीद थी, उनमें बेहद कम अंक दिए गए। विवाद तब और बढ़ गया जब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कॉपी देखने के लिए खोली गई वेबसाइट भी बार-बार क्रैश होने लगी और हजारों छात्र आवेदन ही नहीं कर पाए।

क्या है OSM सिस्टम, जिससे शुरू हुआ पूरा विवाद?

पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल स्क्रीन पर जांची गईं कॉपियां

OSM यानी On-Screen Marking एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इस सिस्टम में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन किया जाता है और फिर उनकी डिजिटल कॉपी परीक्षक के कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई जाती है। परीक्षक स्क्रीन पर ही नंबर देते हैं।

पहले परीक्षक छात्रों की मूल उत्तर पुस्तिका हाथ में लेकर जांच करते थे, लेकिन इस बार CBSE ने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन को लागू किया। बोर्ड का दावा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, कॉपियों के गुम होने का खतरा कम होगा और मूल्यांकन प्रक्रिया पहले से तेज और सुरक्षित बनेगी।

हालांकि रिजल्ट आने के बाद यही सिस्टम विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गया।

छात्रों ने OSM सिस्टम में क्या-क्या खामियां बताईं?

“कई जवाब साफ दिखाई ही नहीं दिए”

छात्रों और शिक्षकों ने OSM सिस्टम में कई गंभीर तकनीकी खामियां बताई हैं। सबसे बड़ा आरोप कॉपियों की स्कैनिंग को लेकर लगा।

छात्रों का कहना है कि:

  • कई पेज धुंधले स्कैन हुए
  • गणित और फिजिक्स के स्टेप्स कट गए
  • डायग्राम और ग्राफ साफ दिखाई नहीं दिए
  • लंबे उत्तरों के हिस्से गायब थे
  • लिखावट स्क्रीन पर स्पष्ट नहीं थी
  • कुछ सवालों को जांचा ही नहीं गया

कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनकी कॉपी में पूरे उत्तर लिखे थे, लेकिन स्कैन कॉपी देखने पर कई हिस्से गायब मिले।

छात्रों का कहना है कि जब परीक्षक को उत्तर साफ दिखाई ही नहीं देंगे तो सही मूल्यांकन कैसे संभव होगा।

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JEE Main पास छात्र भी कम नंबर आने से हैरान

“एंट्रेंस में अच्छा स्कोर, लेकिन बोर्ड में कम नंबर”

सबसे ज्यादा सवाल उन छात्रों के रिजल्ट को लेकर उठे जिन्होंने JEE Main और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बोर्ड परीक्षा में उम्मीद से काफी कम अंक मिले।

कई छात्रों ने कहा कि:

“अगर हम राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में अच्छा स्कोर कर सकते हैं तो बोर्ड में अचानक इतने कम नंबर कैसे आ गए?”

इसके बाद सोशल मीडिया पर “Recheck CBSE Copies” और “Justice for Students” जैसे अभियान ट्रेंड करने लगे।

इस बार का CBSE रिजल्ट हर साल से अलग क्यों रहा?

डिजिटल मूल्यांकन का असर सीधे परिणामों में दिखा

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का रिजल्ट पिछले वर्षों से अलग रहा क्योंकि पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन लागू किया गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • स्क्रीन पर लंबे उत्तर पढ़ना कठिन होता है
  • स्कैन क्वालिटी खराब होने पर जवाब समझना मुश्किल हो जाता है
  • डिजिटल मूल्यांकन में तकनीकी दिक्कतों का असर सीधे नंबरों पर पड़ सकता है
  • जल्दी मूल्यांकन के दबाव में उत्तर छूटने की आशंका रहती है

इसी वजह से इस बार री-इवैल्यूएशन और कॉपी वेरिफिकेशन के लिए रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने आवेदन करने की कोशिश की।

री-इवैल्यूएशन वेबसाइट ठप होने से और भड़का गुस्सा

आवेदन के समय पोर्टल ने दिया जवाब

रिजल्ट से नाराज छात्रों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कॉपी देखने के लिए शुरू किया गया CBSE पोर्टल ठीक से काम नहीं कर सका।

छात्रों ने आरोप लगाया कि:

  • वेबसाइट बार-बार क्रैश हो रही थी
  • लॉगिन नहीं हो पा रहा था
  • पेमेंट के बाद पेज फ्रीज हो रहा था
  • आवेदन सबमिट नहीं हो रहे थे
  • कई छात्रों का पैसा कट गया लेकिन फॉर्म जमा नहीं हुआ

देशभर के छात्रों ने सोशल मीडिया पर वेबसाइट के स्क्रीनशॉट साझा कर अपनी नाराजगी जाहिर की। कई छात्रों ने दावा किया कि वे अंतिम तारीख तक आवेदन ही नहीं कर पाए।

“पहले गलत मूल्यांकन, फिर वेबसाइट बंद”

अभिभावकों का कहना है कि पहले छात्रों को तकनीकी खामियों की वजह से कम नंबर दिए गए और जब उन्होंने पुनर्मूल्यांकन की मांग की तो वेबसाइट ने भी काम करना बंद कर दिया।

कई छात्रों ने इसे “दोहरी परेशानी” बताया।

स्कैनिंग में आई बड़ी तकनीकी दिक्कतें

हजारों कॉपियों को दोबारा स्कैन करना पड़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों उत्तर पुस्तिकाओं में स्कैनिंग संबंधी समस्याएं सामने आईं। कई कॉपियों को दोबारा स्कैन करना पड़ा, जबकि हजारों कॉपियों की मैनुअल जांच भी करनी पड़ी।

बताया गया कि:

  • कुछ स्कैन धुंधले थे
  • कई पेज अधूरे अपलोड हुए
  • डेटा मैचिंग में दिक्कत आई
  • सर्वर प्रोसेसिंग धीमी रही
  • कई कॉपियों का डिजिटल फॉर्मेट खराब हो गया

इन खामियों ने पूरे OSM सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

“बिना तैयारी लागू किया गया सिस्टम” — शिक्षा विशेषज्ञ

“डिजिटल सिस्टम अच्छा, लेकिन तैयारी अधूरी थी”

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की जरूरत हो सकता है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर इसे लागू करने से पहले मजबूत तकनीकी तैयारी और ट्रायल जरूरी था।

कुछ शिक्षकों ने माना कि OSM सिस्टम का विचार गलत नहीं है, लेकिन स्कैनिंग और सर्वर मैनेजमेंट मजबूत न होने की वजह से छात्रों का नुकसान हुआ।

CBSE ने क्या सफाई दी?

बोर्ड बोला- “सिस्टम पारदर्शी और सुरक्षित”

CBSE ने विवाद बढ़ने के बाद सफाई देते हुए कहा कि OSM प्रणाली पारदर्शी और आधुनिक है। बोर्ड के मुताबिक मूल्यांकन प्रशिक्षित परीक्षकों ने किया और तकनीकी समस्याओं को लगातार मॉनिटर किया गया।

हालांकि विरोध बढ़ने के बाद बोर्ड को:

  • री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया आसान करनी पड़ी
  • स्कैन कॉपी देखने की सुविधा बढ़ानी पड़ी
  • आवेदन की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी
  • फीस में राहत देनी पड़ी

छात्रों के भविष्य पर बड़ा सवाल

“तकनीकी गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं?”

OSM सिस्टम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा केवल नंबर नहीं बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और करियर से जुड़ी होती है।

ऐसे में अगर तकनीकी खामियों, खराब स्कैनिंग और वेबसाइट फेल होने जैसी समस्याओं का असर छात्रों के परिणामों पर पड़ा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। फिलहाल देशभर के छात्र निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन और पूरी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, ताकि किसी छात्र की सालभर की मेहनत तकनीकी लापरवाही की भेंट न चढ़े।

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Comments

  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram