मेरठ में सफाई व्यवस्था निजी हाथों में, 119 किमी सड़कों की सफाई पर हर महीने खर्च होंगे 1.23 करोड़ रुपये

मेरठ में सफाई व्यवस्था निजी हाथों में, 119 किमी सड़कों की सफाई पर हर महीने खर्च होंगे 1.23 करोड़ रुपये

मेरठ की सफाई अब निजी हाथों में, करोड़ों रुपये की नई व्यवस्था से बदलेगी शहर की तस्वीर या बढ़ेंगे सवाल?

नगर निगम ने शुरू किया बड़ा प्रयोग, 119 किलोमीटर सड़कों की सफाई का जिम्मा एजेंसी को

मेरठ। शहर की सड़कों पर फैली धूल, बाजारों में जमा होने वाला कूड़ा और सफाई व्यवस्था को लेकर उठते सवालों के बीच नगर निगम ने एक नई पहल शुरू की है। अब मेरठ की प्रमुख सड़कों और उनसे जुड़े बाजारों की सफाई का काम निजी एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि इससे शहर की साफ-सफाई में बड़ा बदलाव आएगा और प्रमुख मार्ग पहले से अधिक स्वच्छ दिखाई देंगे।

इस नई व्यवस्था की शुरुआत गुरुवार को सांसद अरुण गोविल ने की। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों की मौजूदगी रही। हालांकि सफाई व्यवस्था के इस नए मॉडल को लेकर शहर में चर्चा सिर्फ इसके शुभारंभ की नहीं, बल्कि उस भारी भरकम खर्च की भी है जो नगर निगम को हर महीने वहन करना होगा।

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रोजाना लाखों रुपये खर्च करेगी नगर निगम

नगर निगम के अनुसार इस परियोजना पर प्रतिदिन करीब 4.10 लाख रुपये खर्च होंगे। यानी एक महीने में लगभग 1.23 करोड़ रुपये और सालाना करोड़ों रुपये की राशि इस व्यवस्था पर खर्च की जाएगी।

शहर की 119 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़कों और उनसे जुड़े व्यावसायिक क्षेत्रों को इस योजना में शामिल किया गया है। नगर निगम का मानना है कि नियमित और तय समय पर सफाई होने से शहर का स्वरूप बेहतर होगा और लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।

दो शिफ्ट में होगा सफाई अभियान

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सफाई कार्य दिन में दो बार होगा। पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से 10 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी शिफ्ट शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक संचालित की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि सुबह की सफाई से दिन की शुरुआत साफ माहौल में होगी, वहीं शाम की शिफ्ट बाजारों और सड़कों पर दिनभर जमा हुई गंदगी को हटाने का काम करेगी। इससे मुख्य मार्गों पर लगातार स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

300 कर्मचारी और दर्जनों वाहन संभालेंगे जिम्मेदारी

इस परियोजना के लिए लगभग 300 सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है। इनके अलावा 40 ई-रिक्शा और 15 छोटे वाहन भी सफाई कार्य में उपयोग किए जाएंगे।

सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी सिर्फ झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं होगी। उन्हें सड़क किनारे जमा कचरा हटाने, डिवाइडरों की सफाई करने, पेड़ों की छंटाई कराने, सिंचाई व्यवस्था देखने और छोटे नालों की सफाई जैसे कई कार्य करने होंगे।

क्या-क्या करेगी एजेंसी?

  • मुख्य सड़कों की नियमित सफाई
  • डिवाइडरों की धूल और गंदगी हटाना
  • सड़क किनारे उगी घास और झाड़ियों की सफाई
  • पेड़ों की छंटाई और सिंचाई
  • नालियों की सफाई
  • बाजार क्षेत्रों में कूड़ा संग्रहण
  • मशीनों के माध्यम से सड़क सफाई

मशीनों से चमकेंगी प्रमुख सड़कें

नगर निगम ने इस योजना में आधुनिक तकनीक को भी शामिल किया है। कई प्रमुख मार्गों की सफाई रोड स्वीपिंग मशीनों के जरिए की जाएगी। इससे सड़क पर जमी धूल और बारीक कचरे को तेजी से हटाया जा सकेगा।

वहीं जिन क्षेत्रों में मशीनें नहीं पहुंच सकतीं, वहां मैनुअल सफाई का सहारा लिया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि मशीन और मानव श्रम के इस मिश्रित मॉडल से बेहतर परिणाम मिलेंगे।

लापरवाही हुई तो सीधे कटेगा जुर्माना

नगर निगम ने एजेंसी को जिम्मेदारी देने के साथ-साथ जवाबदेही तय करने की भी व्यवस्था की है। यदि किसी सड़क पर सफाई नहीं मिलती या कर्मचारी निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते हैं तो एजेंसी पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

सफाई में कमी मिलने, कर्मचारियों के बिना यूनिफॉर्म या सुरक्षा उपकरणों के कार्य करने, मशीनों के बंद रहने अथवा शिकायतों का समय पर समाधान न करने पर हजारों रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

क्या बदलेगी मेरठ की तस्वीर?

नगर निगम इस व्यवस्था को शहर की स्वच्छता में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि योजना सफल रही तो आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

हालांकि दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि जब इस व्यवस्था पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होंगे तो इसके परिणाम भी स्पष्ट दिखाई देने चाहिए। शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नई व्यवस्था केवल कागजों और दावों तक सीमित रहती है या वास्तव में मेरठ की सड़कों और बाजारों की तस्वीर बदलने में सफल होती है।

फिलहाल इतना तय है कि मेरठ ने सफाई व्यवस्था को लेकर एक नया प्रयोग शुरू किया है। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि करोड़ों रुपये की यह योजना शहर को स्वच्छ बनाने में कितनी कारगर साबित होती है और जनता की उम्मीदों पर कितना खरी उतरती है।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram