सोमेंद्र तोमर का बढ़ा कद! BJP ने पश्चिम यूपी में साधा गुर्जर वोट बैंक, 2027 की तैयारी तेज

सोमेंद्र तोमर का बढ़ा कद! BJP ने पश्चिम यूपी में साधा गुर्जर वोट बैंक, 2027 की तैयारी तेज

मेरठ से लखनऊ तक बढ़ा सोमेंद्र तोमर का कद, क्या BJP ने साध लिया पश्चिम यूपी का सबसे बड़ा गुर्जर समीकरण?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 9 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। Somender tomer को राज्य मंत्री से प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया जाना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की बड़ी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

मेरठ दक्षिण से विधायक सोमेंद्र तोमर का राजनीतिक कद बढ़ाकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। एक तरफ मेरठ और पश्चिम यूपी के प्रतिनिधित्व को मजबूती दी गई है, तो दूसरी तरफ गुर्जर वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने का संदेश भी दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को सीधे तौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश के बदलते जातीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

छात्र राजनीति से मंत्री पद तक पहुंचा सफर

सोमेंद्र तोमर का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से निकले सोमेंद्र तोमर ने संगठन में काम करते हुए भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। संगठनात्मक क्षमता, कार्यकर्ताओं से तालमेल और क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने की वजह से उन्होंने पार्टी नेतृत्व का भरोसा जीता।

मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट पर उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई और भाजपा ने उन्हें पहले ऊर्जा राज्य मंत्री बनाया। अब स्वतंत्र प्रभार का दर्जा देकर पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि पश्चिम यूपी में उनकी भूमिका भविष्य में और बड़ी होने वाली है।

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क्यों अहम है गुर्जर वोट बैंक?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुर्जर वोट बैंक बेहद प्रभावशाली माना जाता है। मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और आसपास की कई विधानसभा सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गुर्जर वोट एकतरफा किसी दल के पक्ष में चला जाए तो चुनावी नतीजों पर उसका बड़ा असर पड़ सकता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पश्चिम यूपी में बड़ी सफलता मिली थी, जिसमें गैर-यादव OBC और गुर्जर वोट बैंक की अहम भूमिका मानी गई थी। भाजपा अब उसी सामाजिक समीकरण को फिर से मजबूत करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।

समाजवादी पार्टी भी बना रही रणनीति

दूसरी तरफ को समाजवादी पार्टी लगातार atul pradhan प्रमुखता देती रही है। सरधना विधायक अतुल प्रधान को पश्चिम यूपी में पार्टी का बड़ा चेहरा बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

इसके अलावा समाजवादी पार्टी कई गुर्जर सम्मेलनों का आयोजन भी कर चुकी है। इन आयोजनों का मकसद गुर्जर समाज में अपनी पैठ बढ़ाना और भाजपा के परंपरागत समर्थन आधार में सेंध लगाना माना जा रहा है। सपा नेतृत्व समझता है कि यदि पश्चिम यूपी में गुर्जर वोट बैंक का बड़ा हिस्सा उसके साथ आता है तो भाजपा के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है।

BJP का जवाब: सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन

इसी राजनीतिक चुनौती के बीच भाजपा ने सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाकर बड़ा संदेश दिया है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि गुर्जर समाज को भाजपा में सम्मान और मजबूत प्रतिनिधित्व मिल रहा है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो सोमेंद्र तोमर की गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ मानी जाती है। संगठन और समाज दोनों स्तर पर उनकी सक्रियता उन्हें भाजपा के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें स्वतंत्र प्रभार जैसा अहम दर्जा दिया गया।

भाजपा की रणनीति केवल मंत्री पद देने तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसके जरिए पार्टी पश्चिम यूपी के गुर्जर समाज को यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा नेतृत्व क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दे रहा है।

मेरठ की राजनीति में भी बड़ा संदेश

सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन मेरठ की राजनीति में भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। लंबे समय बाद मेरठ को सरकार में इतना मजबूत प्रतिनिधित्व मिला है। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच इसे संगठन के समर्पित कार्यकर्ता को मिला सम्मान बताया जा रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में पश्चिम यूपी भाजपा की चुनावी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनने वाला है। ऐसे में सोमेंद्र तोमर जैसे नेताओं को आगे लाकर पार्टी जातीय और क्षेत्रीय दोनों समीकरण साधने की कोशिश कर रही है।

2027 की तैयारी अभी से शुरू?

मंत्रिमंडल विस्तार के इस फैसले को 2027 विधानसभा चुनाव की शुरुआती तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा जानती है कि पश्चिम यूपी में मुकाबला आसान नहीं रहने वाला। किसान आंदोलन, स्थानीय मुद्दे और जातीय समीकरण चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसे में सोमेंद्र तोमर का बढ़ता राजनीतिक कद सिर्फ एक मंत्री का प्रमोशन नहीं, बल्कि भाजपा की बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि भाजपा का यह दांव पश्चिम यूपी के गुर्जर वोट बैंक पर कितना असर डालता है और विपक्ष इसके जवाब में कौन सी नई रणनीति तैयार करता है।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram