खेतो में मेड़बंदी Bundling क्या होती है, और क्यो करते है ?

खेतो में मेड़बंदी Bundling क्या होती है, और क्यो करते है ?

प्रकृति ने हमे जीवन जीने के लिए अनेक संसाधन मुहय्या किये हैं ।यदि हम इनका उपयोग सही ढंग से नही कर पाते हैं और उनकी दुरुपयोग करते हैं तो आने वाले समय में हमे कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है जिस प्रकार मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में सबसे महत्वपूर्ण जल वायु है, हमारी समस्त आवश्यकताएं जल पर निर्भर है तभी तो जल ही जीवन कहा गया है। मनुष्य को जब से भोजन की आवश्यकता पड़ी होगी हमारे पुरखों ने भोजन का आविष्कार किया होगा। एक स्थान पर फसल उगाई होगी, फसलें पैदा की गई होगी। जमीन समतल कर खेती योग्य बनाया गयी होगी। खाद्यान्न पैदा करने के लिए खेत का निर्माण तय हुआ होगा, तभी से मेड़बंदी (Bundling) जैसी जल संरक्षण की विधि का आविष्कार हुआ होगा।

यह हमारे देश के पुरखों की विधि है जिनसे खेत खलिहान का जन्म हुआ है। जिन्होंने जल संरक्षण की परम्परागत प्रमाणित सरल सर्वमान्य मेड़बंदी (Bundling) विधि का आविष्कार किया है।

मेड़बंदी (Bundling) से खेत में वर्षा का जल रूकता है, और भू-जल संचय होता है। इससे भू-जल स्तर बढ़ता है और गॉव की फसलां का जलभराव के कारण होने वाले नुकसान से बचाता है।

भूमि के कटाव के कारण मृदा के पोषक तत्व खेत में ही बने रहते है, जो पैदावार के लिए आवश्यक है। नमी संरक्षण के कारण फसल सड़ने से खेत को परम्परागत जैविक खाद की ऊर्जा प्राप्त होती है।

मेड़बंदी (Bundling) से एक ओर जहॉ भूमि को खराब होने से बचाव होता है वहीं पशुओं को मेड़ पर शुद्ध चारा, भोजन प्राप्त होता है। इसे मेड़बन्दी, चकबन्दी, घेराबन्दी, हदबन्दी, छोटी मेड़बन्दी, बड़ी मेड़बन्दी तिरछी मेड़बन्दी सुविधानुसार जैसे अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

धान, गेहूॅ की फसल तो केवल मेड़बन्दी से रूके जल से ही होती है। हमारे देश के पूर्वज जल रोकने के लिए खेत के ऊपर मेड़, मेड़ के ऊपर फलदार, छायादार औषधीय पेड़ लगाते थे। जिसकी छाया खेत में फसल पर कम पड़े जैसे बेल, सहजन, सागौन, करौंदा, अमरूद, नीबू, बेर, कटहल, शरीफा के पेड़ लगाये जा सकते हैं। यह पेड़ इमारती लकड़ी आयुर्वेदिक औषधियों, फलों के साथ अतिरिक्त आय भी देती है।

इन पेड़ों की छाया खेत में कम पड़ती है। इनके पत्तों से खेत को जैविक खाद मिलती है, पर्यावरण शुद्ध रहता है। मेड़ के ऊपर हमारे पुरखे अरहर, मूंग, उर्द, अलसी, सरसों, ज्वार, सन जैसी फसलें पैदा करते रहे हैं जिन्हें पानी कम चाहिए। जमीन सतह से ऊपर हो, मेड़ से अतिरिक्त उपज की फसल ले सकते हैं।

मेड़बंदी (Bundling) से उसर भूमि को उपजाऊ बनाया जा रहा है। जहॉ-जहॉ जल संकट है उसका एकमात्र उपाय है वर्षा जल को अधिक से अधिक खेत में मेड़बन्दी के माध्यम से रोकना चाहिए।मेड़बन्दी के माध्यम से खेत में वर्षा जल रोकने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर के प्रधानों को पत्र लिख मेड़बन्दी कर खेत में वर्षा बूंदों को रोकने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि परम्परागत विधियों से भू-जल संरक्षण करें। जिससे हमारी भूजल सम्पदा बनी रहे।

हमारे देश में बड़ी संख्या में तालाब, कुओं, निजी ट्यूबबेल के सिंचाई साधन होने के बावजूद भी कई हजारों हेक्टे0 भूमि की खेती वर्षा जल पर निर्भर है। वर्षा तो हर गॉव में होती है, वर्षा के भरोसे खेती होती है। खासकर बुन्देलखण्ड के इलाके में पहाड़ी, पठारी क्षेत्र के खेतों में मेड़बन्दी के माध्यम से जल रोककर उपजाऊ बनाया जा सकता है। किसान ड्रिप पद्धति, टपक पद्धति, फुहारा पद्धति किसी भी पद्धति से फसल की सिंचाई करें पानी तो सभी विधि को चाहिए।

इसलिए जल संरक्षण जरूरी है।सामुदायिक आधार पर जल संरक्षण की प्राचीन परम्परा हमारे देश में रही है, सिंचाई के दो ही साधन है या तो भू-जल या वर्षा जल। भू में जब जल होगा, तभी नवीन संसाधन चलेंगे। आज भूमिगत जल पर जबरदस्त दबाव है। भू-जल नीचे चला जा रहा है।
इसलिए भूजल का संरक्षण मेंडबन्दी से किया जाय। समस्त सभ्यताएं जल पर निर्भर है, हम बादलों पर निर्भर हैं बादल चाहें तो बरसें या न बरसें। यदि वर्षा बूंदों को पकड़ना है तो मेड़बन्दी जरूरी है यह कोई बड़ी तकनीक नहीं है। चौड़ी ऊॅची मेड़ अपनी मेहनत और श्रम से खेत में बनाई जा सकती है। जिससे फसल की अच्छी पैदावार हो और भूजल स्तर भी बढ़े।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram