आईएफडब्ल्यूजे अध्यक्ष के. विक्रम राव : पत्रकारिता का छह दशकों का सशक्त हस्ताक्षर
— प्रेस की स्वतंत्रता, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और पत्रकारों के हक़ की लड़ाई के अग्रदूत
मेरठ: वरिष्ठ पत्रकार और भारतीय पत्रकार महासंघ (आईएफडब्ल्यूजे) के अध्यक्ष के. विक्रम राव का दो दिन पूर्व लखनऊ में निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता जगत में गहरा शोक व्याप्त है। उनकी स्मृति में मेरठ के निंबस बुक स्टोर पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पत्रकार साथियों ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में वक्ताओं ने के विक्रम राव के पत्रकारिता के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
प्रेस की स्वतंत्रता के प्रहरी
के विक्रम राव 2010 में आईएफडब्ल्यूजे के 12वें अध्यक्ष चुने गए थे। 1976 में आपातकाल के दौरान प्रेस सेंसरशिप के विरोध में आवाज़ उठाने पर उन्हें 13 महीने की जेल हुई थी। उन्होंने मजीठिया वेतन बोर्ड के माध्यम से पत्रकारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाई और 950 से अधिक पत्रकारों को अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और संवाद यात्राओं का अवसर दिलाया।
टाइम्स ऑफ इंडिया से वॉयस ऑफ अमेरिका तक
1962 से 1998 तक टाइम्स ऑफ इंडिया से जुड़े रहे राव ने वॉयस ऑफ अमेरिका में संवाददाता की भूमिका निभाई। उनकी रिपोर्टिंग मुरादाबाद, हैदराबाद, अहमदाबाद दंगों और सूखा-पीड़ित इलाकों में मानवीय दृष्टिकोण के लिए सराही गई। उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स और फिल्मफेयर के लिए भी कार्य किया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और पीआईबी की केंद्रीय समितियों में सदस्य रहते हुए उन्होंने मीडिया की भूमिका को दिशा दी। कश्मीर, पंजाब और अयोध्या मामलों पर प्रेस काउंसिल की जांच रिपोर्टों में उनकी निर्णायक भागीदारी रही। उन्होंने 45 से अधिक देशों का दौरा कर भारतीय पत्रकारिता को वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत किया।
शिक्षा, मूल्यमान और पारिवारिक विरासत
नई दिल्ली में जन्मे के विक्रम राव की शिक्षा सेवाग्राम, चेन्नई, नागपुर और लखनऊ विश्वविद्यालय में हुई। उन्होंने राजनीति विज्ञान में परास्नातक कर अंतरराष्ट्रीय संबंध पढ़ाए। पत्रकारिता के प्रति उनके समर्पण की जड़ें गहरी थीं—उनके पिता स्व. के. रामा राव नेशनल हेराल्ड के संस्थापक संपादक और स्वतंत्रता सेनानी थे।
एक प्रेरणादायी विराम
के विक्रम राव शराब व धूम्रपान से दूर, शाकाहारी और अनुशासित जीवन जीते थे। उनकी पत्नी भारतीय रेलवे में मुख्य चिकित्सा निदेशक थीं। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हैं। उनके जीवन और कार्यों की प्रेरणा आने वाली पत्रकार पीढ़ियों के लिए मिसाल बनी रहेगी।
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