स्टडी वीजा बना मौत का रास्ता: रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तराखंड के राकेश कुमार की मौत
रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तराखंड के युवक की मौत, पढ़ाई के लिए गया राकेश कुमार जबरन रूसी सेना में किया गया था भर्ती
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सितारगंज (उत्तराखंड) | भारतीय वाणी
रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक खबर उत्तराखंड से सामने आई है। सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के शक्तिफार्म निवासी राकेश कुमार की रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मौत हो गई। बुधवार को उनका पार्थिव शरीर भारत लाया गया, जिसके बाद शक्तिफार्म स्थित तारकनाथ धाम में पूरे राजकीय सम्मान और नम आंखों के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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पढ़ाई के लिए रूस गया था राकेश
मृतक राकेश कुमार (उम्र लगभग 30 वर्ष) पुत्र राजबहादुर मौर्य, ग्राम सुरेंद्रनगर, शक्तिफार्म के निवासी थे। परिजनों के अनुसार राकेश 8 अगस्त 2025 को स्टडी वीजा पर रूस पढ़ाई के लिए गया था। शुरुआत में वह परिजनों से नियमित संपर्क में था।
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जबरन रूसी सेना में भर्ती का आरोप
परिजनों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद राकेश का वीजा और पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और उसे जबरन रूसी सेना में भर्ती कर प्रशिक्षण दिया गया।
राकेश ने 30 अगस्त 2025 तक अपने परिवार से बातचीत की थी, जिसमें उसने बताया था कि उसे सैन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है और जल्द ही यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेजा जाएगा।
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भारत सरकार से लगाई थी गुहार
30 अगस्त के बाद राकेश से संपर्क पूरी तरह टूट गया। इसके बाद परिजनों ने 5 सितंबर 2025 को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के शिकायत विभाग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।
परिजन दिल्ली जाकर अधिकारियों से भी मिले, जहां उन्हें आश्वासन दिया गया था कि राकेश को सुरक्षित भारत वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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10 दिन पहले मिली शहादत की सूचना
करीब 10 दिन पहले भारत सरकार के अधिकारियों ने परिजनों से संपर्क कर सूचना दी कि राकेश कुमार की युद्ध के दौरान मौत हो चुकी है। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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दिल्ली एयरपोर्ट से शक्तिफार्म तक अंतिम यात्रा
17 दिसंबर 2025 को राकेश कुमार का पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। वहां से शव को उत्तराखंड के सितारगंज स्थित शक्तिफार्म लाया गया।
शाम 4:45 बजे तारकनाथ धाम में पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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गांव में शोक की लहर
राकेश की मौत से पूरे शक्तिफार्म क्षेत्र में शोक की लहर है। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक लोग और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हर आंख नम थी और हर जुबां पर एक ही सवाल—पढ़ाई के लिए गया युवक युद्ध में कैसे झोंक दिया गया?
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