अंकिता भंडारी केस में नाम घसीटने पर दुष्यंत गौतम का पलटवार, दर्ज कराया मुकदमा

अंकिता भंडारी केस में नाम घसीटने पर दुष्यंत गौतम का पलटवार, दर्ज कराया मुकदमा

अंकिता भंडारी हत्याकांड: नाम घसीटे जाने पर दुष्यंत गौतम का पलटवार, कानूनी कार्रवाई शुरू

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड से खुद को बेवजह जोड़े जाने पर नाराज ने अब कानूनी रास्ता अख्तियार कर लिया है। दुष्यंत गौतम ने देहरादून के में तहरीर देकर पूर्व विधायक , और कुछ राजनीतिक दलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उनका नाम जानबूझकर उछाला गया, जबकि इस मामले से उनका कोई संबंध नहीं है।

सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप

दुष्यंत गौतम का कहना है कि अंकिता भंडारी प्रकरण से जोड़कर उनके खिलाफ सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भ्रामक व अपमानजनक बयान दिए गए। इससे न केवल उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई, बल्कि परिवार और समर्थकों के बीच भी गलत संदेश गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं की गई।

दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंची शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए दुष्यंत गौतम ने स्थानीय स्तर के साथ-साथ में भी शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत छवि का सवाल नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जिम्मेदार बयानबाजी का भी मुद्दा है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष व्यक्ति को इस तरह बदनाम न किया जा सके।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

दुष्यंत गौतम की इस कार्रवाई के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ नेताओं का कहना है कि बिना प्रमाण किसी का नाम उछालना गलत है और इसकी जांच होनी चाहिए।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और कानून के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि हत्याकांड पहले से ही संवेदनशील और चर्चित मामला है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति का नाम बिना ठोस आधार के जोड़ना न केवल गलत सूचना फैलाता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। दुष्यंत गौतम की यह पहल अब इस बहस को और तेज कर रही है कि राजनीतिक आरोपों की सीमा क्या होनी चाहिए और जवाबदेही कैसे तय की जाए।

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Comments

  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram