जनिये उत्तराखंड के भूतिया जगहों के बारे में जहां आज भी जाने से डरते हैं लोग...
उत्तराखंड में कई ऐसी भूतिया जगह हैं जहां जाना खतरे से खाली नहीं। क्योंकि लोग कहते हैं कि यहां रुहों का बसेरा है। यहां भूतों की आवाज़ें रात में सुनाई देती हैं। इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो हम नहीं जानते। लेकिन वहां के स्थानीय निवासी इस बात को सच बताते हैं। तो चलिए बताते हैं आपको उत्तराखंड की इन भूतिया जगहों के बारें में।
ऐबे कोठी, चंपावत
चंपावत जिले के लोहाघाट में अब्बोट माउंट पर एक ऐबे नाम की कोठी है। जहां भूतों का बसेरा है। सूरज ढ़लने के बाद यहां कोई नहीं जाता। वहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां बुरी आत्माएं दिखाई देती हैं। इस बंगले को ब्रिटिश काल में बनाया गया था। कुछ समय बाद इस बंगले को किसी चैरिटेबल अस्पताल को दे दिया था। लेकिन एक डॉक्टर के वहां आने से संदिग्ध गतिविधियां होने लगी। ये डॉक्टर मरीजों की मौत की भविष्यवाणी करता था। अस्पताल के अंदर ‘मुक्ति बोध’ कोठरी नाम का एक कमरा था। जिसमें मरीज़ों को ले जाया जाता था और वहां जाकर मरीज़ की मौत हो जाती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह डॉक्टर कमरे में ले जाकर खुद ही लोगों को मार देता था। लोग कहते हैं इस बंगले में उन मरे हुए लोगों की आत्माएं घूमती हैं और कई लोगों को दिखाई भी देती हैं।
सवॉय होटल, मसूरी
ये होटल मसूरी में स्थित है। 121 कमरों वाला यह होटल भूतिया होटल माना जाता है। लोगों की माने तो इस होटल में एक ब्रिटिश महिला की रहस्यमय तरीके से हत्या कर दी गई थी। इस महिला के शव का जिस डॉक्टर ने पोस्टमार्टम किया था उसकी भी अचानक मौत हो गई थी। इस महिला की एक व्यक्ति ने चित्रकारी की थी उसकी भी मौत हो गई।ये तीनों हत्याएं आज तक रहस्यमयी है। कहते ब्रिटिश महिला की आत्मा हर रात होटल के कमरे में भटकती है और अपने कातिल तलाश करती है। यह होटल कई बार खरीदा और बेचा गया लेकिन इसकी मनहूसियत ने सभी को बर्बाद कर दिया।
मुलिंगर हवेली,मसूरी
मसूरी को बसाने वाले ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी कैप्टेन यंग ने मुलिंगर हवेली का निर्माण कराया था। इसमें वो खुद रहता था। ऐसा कहा जाता है कि यंग को अपनी हवेली से बहुत प्यार था। लेकिन जब उन्हें भारत छोड़कर जाने के लिए कहा गया। तो कैप्टन यंग इस दौरान अपनी हवेली में गए और फिर गायब हो गए। कोई नहीं जानता वो कहाँ गए। लोगों का कहना है कि हवेली में अभी भी कैप्टन की आत्मा घूमती है। कई लोगों ने तो हवेली में कैप्टेन यंग के भूत को देखने का दावा भी किया।
लाम्बी देहर खान, मसूरी
मसूरी में एक खान है जिसका नाम लाम्बी देहर खान है। अंग्रेजों के समय में ये मार्बल की खान हुआ करती थी। ऐसा कहा जाता है कि बहुत सालों पहले इस खान में 50000 से ज़्यादा श्रमिक काम करते थे। चूने की खान में काम करने की वजह से श्रमिकों के फेफड़ों में चूना जम गया था। इस वजह से सारे श्रमिकों को खून की उल्टियां होने लगीं और वहीं पर ही कुछ श्रमिकों की मौत हो गई। जो श्रमिक बचे थे उनकी घर जाते समय एक ट्रक एक्सीडेंट में मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से कई लोगों के एक साथ चीखने की आवाजें आती हैं। यहां पर ‘इंडियन पैरानोर्मल सोसाइटी‘ ने भी रिसर्च किया है।
स्वाला गांव, चंपावत
उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्वाला गांव है जिसे भूतिया गांव कहा जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि स्वाला गांव के पास 1952 में पीएसी की एक बटालियन की गाड़ी खाई में गिर गई थी। गाड़ी के अंदर फंसे जवान अपनी मदद के लिए गांव के लोगों के पुकारते रहे, लेकिन लोगों ने उनकी कोई मदद नहीं की। मदद करने की जगह गांव के लोग उनका सामान लूट कर भाग गए। जवानों की वहीं पर तड़प-तड़प कर गाड़ी में ही मौत हो गई। बताया जाता है कि जवानों की आत्माओं ने इस गांव में इतनी दहशन कर दी कि गांव के लोगों को गांव छोड़कर भागना पड़ा। लोगों का मानना है कि आज भी इस गांव में उनकी आत्माएं घूमती हैं जिसके चलते इस गांव में कोई नही रहता है। ये गांव बिलकुल खाली पड़ा है।
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