एक ऐसा मंदिर जहां कोई नहीं कर सकता भगवान के दर्शन
उत्तराखंड के चमोली और कुमाऊं सीमा से लगे क्षेत्र की अराध्य देवी मां नंदा के धर्मभाई लाटूदेवता मंदिर वांण देवाल के कपाट विधिविधान मंत्रोच्चारण के साथ खुल गए। इस मौके पर दूर-दराज क्षेत्रों से आए भक्तों ने देवी मंदिर परिसर में अखंड कीर्तन-भजन में भाग लिया। कपाट खुलने के अवसर पर प्रथम पूजा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी के नाम से की गई। इस दौरान वांण में एक दिवसीय बोरी मेला भी संपन्न हुआ।
मंदिर में पूजा अर्चना के लिए भी सिर्फ पुजारी ही जा सकते हैं और वह भी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा-अर्चना करत हैं। एक और खास बात यह है कि मंदिर के गर्भगृह के कपाट सालभर में एक ही दिन खुलते हैं और उसी दिन बंद किए जाते हैं।
देवाल विकासखंड का वांण स्थित लाटू देवता मंदिर समुद्रतल से आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली नंदादेवी राजजात यात्रा के दौरान वांण से आगे उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा का अगुवा लाटू देवता होता है। वांण से आगे निर्जन पड़ाव की यात्रा के दौरान नंदा को विदा करने के लिए धर्मभाई अपनी भूमिका निभाता है।
परंपरा के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन कपाट खुलने की परंपरा है, जिसके लिए भगवान लाटू के मंदिर के कुल पंडित हरिदत्त, उमेश कुनियाल, रमेश कुनियाल ने मंत्रोच्चारण कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर के पुजारी खीम सिंह नेगी ने आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और लाटू की पूजा कर मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोले दिए। मंदिर में पूजा करने वालों का तांता लगा रहा।
मंदिर परिसर में लाटू, भगवती, भैरव, काली के पाश्वों ने देव नृत्य कर प्रसाद वितरण किया। कपाट खुलने के अवसर पर विधायक भूपाल राम टम्टा, ब्लाक प्रमुख डा. दर्शन दानू ने लाटू की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की। इस मौके पर विधायक थराली भूपाल राम टम्टा ने बगडीगाड-हरनी मोटर मार्ग का भी भूमिपूजन किया।
दूसरी ओर कुलीन व सुया में स्थित लाटू मंदिर के कपाट भी धार्मिक मान्यता के अनुसार खोले गए हैं। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट, भाजपा ब्लाक अध्यक्ष उमेश मिश्रा, विधायक प्रतिनिधि सुरेन्द्र बिष्ट, नरेन्द्र बिष्ट, डीएफओ संवेश कुमार दुबे, नंदी कुनियाल, मंजू परिहार, युगराज बसेड़ा, जीवन मिश्रा, पूर्व डिप्टी रेंजर टीएस बिष्ट, इन्द्र सिंह राणा, हीरा पहाड़ी, नारायण सिंह, सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर में नाग मणि विराजमान है। मणि के दर्शन करने पर आंखों की रोशनी जा सकती है, इसलिए पुजारी आंख पर पट्टी बांधकर ही मंदिर में प्रवेश करता है और मंदिर से 75 फीट की दूरी पर श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं। यह भी माना जाता है कि कैदखाने में लाटू देवता एक विशाल सांप के रूप में विराजमान रहते हैं। इन्हें देखकर पुजारी डर न जाएं इसलिए यह आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर का द्वार खोलते हैं।
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