क्या टूटा हुआ गांधी परिवार विपक्ष के खिलाफ हो जाएगा एकजुट, हवा का बदला रूख|

क्या टूटा हुआ गांधी परिवार विपक्ष के खिलाफ हो जाएगा  एकजुट, हवा का बदला रूख|

इंदिरा गांधी परिवार के तीसरे वारिस वरुण गांधी ने भी बहुत ही सुनियोजित तरीके से अपनी पार्टी की ही केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ अघोषित मोर्चा खोल दिया है।वहीं
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर एक बेहद शोधपूर्ण किताब लिखने वाले वरुण गांधी अब खेती-किसानी के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी की केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। पिछले लंबे समय से गांधी परिवार के इन वारिसों को एकजुट करने का सपना संजोने वाले कुछ सूत्रधारों की कोशिश फिर तेज हो गई है कि देर-सबेर इन्हें एक साथ लाया जाए। इस सिलसिले में राहुल और प्रियंका से वरुण को साथ लेकर भाजपा से मोर्चा लेने की बात कुछ ऐसे लोग कर रहे हैं जिनका राजनीति से सीधे कोई लेना-देना नहीं है।

यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है कि जिस तरह कांग्रेस प्रवक्ता टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर खुलकर वरुण गांधी की सराहना कर रहे हैं, वह इस बात का बड़ा संकेत है कि पार्टी नेतृत्व को अब तीसरे गांधी से वैसा परहेज नहीं है जैसा पहले था। कांग्रेस नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक टीवी चैनल पर भाजपा प्रवक्ता को चुनौती देते हुए कहा कि वरुण गांधी के पास जमीर है इसलिए वह किसानों के हक की बात कर रहे हैं, जबकि दूसरे भाजपा नेताओं के पास जमीर नहीं है। इसी तरह एक अन्य प्रवक्ता ने ट्वीटर पर लगातार वरुण गांधी की तारीफ की और लिखा कि मोदी और शाह को कोई भी गांधी बर्दाश्त नहीं है, भले ही वह उनकी ही पार्टी में क्यों न हो। प्रियंका गांधी के सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम तो लगातार वरुण की तारीफ सोशल मीडिया में कर रहे हैं। उन्होंने वरुण के पहले ट्वीट पर ही लिखा कि कोई गांधी ही ऐसा कर सकता है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने किसानों को लेकर किए गए वरुण के हर ट्वीट और बयान को सराहा और उसका स्वागत किया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने फोन करके भी वरुण को उनके इन तेवरों के लिए बधाई दी है।

जहां पंजाब उत्तर प्रदेश की घटनाओं और राजस्थान, छत्तीसगढ़ में पार्टी के असंतोष को थामने से कांग्रेस में पार्टी के नए नेतृत्व राहुल प्रियंका का दबदबा बढ़ा है, तो किसानों के पक्ष में वरुण के खुलकर उतरने से परिवार के इस तीसरे गांधी की लोकप्रियता में भी इजाफा हो रहा है। सियासी हलकों में यह सवाल आम है कि क्या ये तीनों गांधी आने वाले दिनों में एक साथ दिखाई देंगे और अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की शक्ति से संपन्न जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली भाजपा को एक बार फिर इंदिरा गांधी की विरासत से सियासी जंग में जूझना पड़ेगा। हालांकि अभी कुछ भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन सियासी अखाड़े के कुछ महारथियों ने गांधी परिवार को एकजुट करने की कोशिशें शुरू भी कर दी हैं।

राजीव गांधी के जमाने से परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक कोई और नहीं बल्कि खुद प्रियंका गांधी भी चाहती हैं कि छोटे भाई वरुण की घर वापसी हो और वह कांग्रेस में आकर न सिर्फ परिवार औऱ पार्टी को ताकत दें, बल्कि भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष की धार को भी मजबूत करें। पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस के भीतर और बाहर का घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर जबरदस्त मंथन और उतार चढ़ाव का दौर चल रहा है। जिस तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने आगे बढ़कर पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अजेयता को तोड़कर दलित चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर और नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे को वापस लेने के लिए राजी करके साफ जता दिया कि नतीजे कुछ भी हों, लेकिन पार्टी हाईकमान अब छत्रपों की धमकियों और दबावों के आगे नहीं झुकेगा।

अशोक गहलोत ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान संभालने के सुझाव का पूरी कार्यसमिति ने एक स्वर से समर्थन करके जी-23 के राहुल विरोध की भी हवा निकाल दी। क्योंकि बैठक में इस समूह के दोनों अगुआ नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा भी इस सुझाव के समर्थन पर मुहर लगाने वालों में शामिल थे। इस सुझाव पर विचार करने की बात कह कर राहुल गांधी ने भी साफ कर दिया कि अब उन्हें पार्टी अध्यक्ष संभालने में कोई हिचक नहीं है और उन्होंने अपने पुराने रुख कि पार्टी अध्यक्ष कोई गैर गांधी बने, को भी नरम कर लिया है। पार्टी ने अपने संगठन चुनावों का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जिसके मुताबिक सितंबर 2022 तक कांग्रेस को नया अध्यक्ष जो कि राहुल गांधी ही होंगे, मिल जाएगा।

उधर तीसरे गांधी वरुण के तेवर केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को लेकर लगातार सख्त हो रहे हैं। वरुण ने इसकी शुरुआत किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए तब की थी, जब उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गन्ने का समर्थन मूल्य चार सौ रुपये करने की मांग करते हुए पत्र लिखा था। इसके बाद जब उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के मूल्य में 25 रुपये की बढोत्तरी की तो वरुण गांधी ने इसके लिए योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए पचास रुपये प्रति कुंतल का बोनस गन्ना किसानों को देने का अनुरोध करते हुए दूसरा पत्र लिख दिया। फिर लखीमपुर खीरी कांड में सबसे पहले जीप से कुचलने वाला वीडियो भी वरुण गांधी ने ही ट्वीट किया। जिससे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा के बचाव की सारी दलीलें धरी रह गईं। इसके बाद वरुण ने अपने अगले ट्वीटास्त्र से लखीमपुर खीरी कांड को लेकर उसे सांप्रदायिक रंग देने वालों पर हमला किया। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक पुराने भाषण के अंश की वीडियो क्लिप को साझा करते हुए ट्वीट किया कि एक बड़े दिल वाले नेता का बड़ा बयान।

जाहिर है वरुण गांधी के ये सारे कदम भाजपा और मोदी सरकार को असहज करने वाले हैं। इसका नतीजा वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति से बाहर करने के रूप में सामने आया।

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Comments

  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram