उत्पन्ना एकादशी व्रत कब है ओर इसका पूजन कैसे करे

उत्पन्ना एकादशी व्रत कब है ओर इसका पूजन कैसे करे

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है।

उतपन्ना एकादशी कब आती है ?

जिसमें पहला कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में पड़ता है। अगहन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाता है । इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखा जाता है। इस एकादशी को कन्या एकादशी और उत्पत्ति एकादशी के नाम भी जानते हैं।
उत्‍पन्‍ना एकादशी व्रत विधि

सुबह उठकर व्रत का संकल्‍प लेकर शुद्ध जल से स्‍नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्‍णु की धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से विधि विधान के साथ पूजा करनी चाहिए। पूरा दिन भजन कीर्तन करते हुए भगवान का ध्‍यान करना चाहिए। संध्‍या में दीपदान करने के पश्‍चात फलाहार ग्रहण करें
एकादशी व्रत कब और कैसे शुरू करें?
आमतौर पर जब किसी को एकादशी व्रत रखना होता है, तो वो किसी भी शुक्ल पक्ष की एकादशी से इस व्रत की शुरुआत कर देते हैं. लेकिन वास्तव में एकादशी व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी से करनी चाहिए. ये एकादशी मार्गशीर्ष माह में आती है और इसे ही पहली एकादशी माना जाता है.
एकादशी के कितने व्रत करने चाहिए?
माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं।
एकादशी का व्रत कैसे करें विधि?
इस दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उंगली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है।
प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए। क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए। इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
एकादशी कृष्ण को बहुत प्रिय है। 
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि इस एकादशी की कथा सुनने से भी ब्राह्मणों को 1000 गायों का दान करने का लाभ मिलता है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एकादशी भगवान कृष्ण की पसंदीदा है और यह सुपरवीन लाभ देती है । 

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram