किसानों को बजट में क्या कुछ खास मिला, क्या आय दोगुनी होगी?
ऊंट के मुंह में जीरा... ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी। अब एक विज्ञापन भी याद कीजिए... पियो बिसलरी ! जी हां वही ऊंट जो बिसलरी भी पी रहा है। इस बार के कृषि बजट में किसानों के साथ भी कुछ यही स्थिति है। काम की घोषणाएं जीरा भर और कुछ ऐलान ऐसे जो ऊंट को बिसलरी पिलाने जैसी लगें।
मसलन, केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का ऐलान किया था। लेकिन कृषि क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री ने वैसा कोई ठोस ऐलान नहीं किया, जिससे किसानों को सीधा फायदा उनकी जेब में आता दिखे। सरकार ने कृषि क्रेडिट कार्ड (KCC) 20 लाख करोड़ बढ़ाने की घोषणा की जो पिछले साल यह 18.5 लाख करोड़ रुपए था। यानी बस कर्ज का बोझ बढ़ाओ।
इसके अलावा सीतारमण ने दो और घोषणाएं कीं। पहला- डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर एग्रीकल्चर: इस ओपन सोर्स से किसानों को खाद बीज से लेकर मार्केट और स्टार्टअप्स तक की जानकारी मिल सकेगी। दूसरा- एग्रीकल्चर एक्सीलरेटर फंड: इसके जरिए गांवों में युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने का मौका मिलेगा। ये सब छोटे और मंझोले किसानों के लिए दूर की कौड़ी है।
कोरोना में देश को बचाने वाले एग्रीकल्चर सेक्टर की GDP में हिस्सेदारी घटी
जब देश आजाद हुआ तो भारत की GDP में कृषि का योगदान 54% और सर्विस सेक्टर का योगदान केवल 29.2% था। धीरे-धीरे देश की इकोनॉमी में सर्विस सेक्टर का योगदान तो बढ़ता गया, लेकिन कृषि का योगदान काफी कम हो गया। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में सर्विस सेक्टर का योगदान 50% से अधिक था और कृषि का योगदान लगभग 17% रह गया। कोरोना के दौरान जहां सभी सेक्टर्स में गिरावट दर्ज की गई, वहीं कृषि ही एकमात्र ऐसा सेक्टर रहा जिसमें ग्रोथ रही।
1947 के मुकाबले 230 गुना बढ़ा गेहूं और चावल का स्टॉक
आपदा की स्थिति में लोगों को भूख से बचाने के लिए सरकार अपने पास अनाजों का स्टॉक रखती है। 1947 में जब देश आजाद हुआ था तो सरकार के पास गेहूं और चावल का स्टॉक 2.38 लाख टन था, लेकिन अब यह 230 गुना बढ़ गया है। 1 अगस्त 2022 को सरकार के मुताबिक, गेहूं और चावल का स्टॉक 545.97 लाख टन है।
देश में हर साल 10 हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर साल 10 हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या करते हैं। 7 सालों में यह आंकड़ा 75 हजार के पार हो चुका है। इससे पहले 2008 से 2014 के बीच करीब 95 हजार
किसानों ने आत्महत्या की थी।
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