बीमार स्वामी रामभद्राचार्य को मंदिर जाना चाहिए था वही ठीक हो जाते अस्पताल क्यों गए - स्वामी प्रसाद मौर्य
कौशांबी : अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित एमएलसी एवं सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार विवादो में बने हुए है। रविवार को कौशांबी में एक बौद्ध सम्मेलन में स्वामी पहुंचे तो यह भी वह विवादित बोल बोलने से नही चुके। कार्यक्रम स्थल पहुंचने से पहले ही हिंदूवादी संगठन ने उनके काफिले पर हमला कर दिया। काले झंडे दिखाकर विरोध प्रकट किया और गाड़ी पर भी तोड़फोड़ करने की कोशिश की।
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में दलितों, पिछड़ों एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। आज भी हमारे देश की राष्ट्रपति को मंदिर में जाने से रोक दिया जाता है। हमारे देश की राष्ट्रपति को क्यों जाने से रोक दिया जाता है क्योंकि वह आदि समाज आदिवासी समाज की महिला हैं? इतना ही नहीं, इसके पहले भी राष्ट्रपति थे रामनाथ कोविंद जी, उनको भी राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर में जाने से रोक दिया था क्यों रोक दिया था, क्योंकि वह भी दलित समाज के थे कोरी थे? उनको भी रोक दिया गया था।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर जाने के सवाल पर कहा कि अब रामभद्राचार्य जी को राम मंदिर जाना चाहिए था, क्योंकि वह जीवन और मौत से जूझ रहे है। वहां जाते तो उनका इलाज हो जाता। उन पर भगवान राम की कृपा हो जाती, लेकिन वहां न जाकर अस्पताल पहुंच गए। इसका मतलब विज्ञान सच है। वैज्ञानिक की ताकत में उनको भी जाना पड़ा। राम में ताकत होती तो वह वहां जाते। इसलिए यह सवाल स्वामी प्रसाद मौर्य से ना पूछ कर, रामभद्राचार्य जी से पूछना चाहिए।
लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने पर के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को समझ बहुत देर में आई है। राम लला मंदिर के उद्घाटन अवसर पर राम लाल प्रकरण के नायक आडवाणी जी को तो आमंत्रित नहीं किया गया। शायद उसी भूल को सुधारने के लिए भारत सरकार ने आडवाणी जी को भारत रत्न की उपाधि दी है। यद्यपि कि आडवाणी जी एक बड़े नेता थे। उनका एक लंबा राजनीतिक संघर्ष था। अभी भी सक्रिय राजनीति में थे। देश की सरकार ने उनको सक्रिय राजनीति से बाहर किया। भले ही प्रायश्चित स्वरूप उन्हें भारत रत्न की उपाधि दी वह स्वागत योग्य है। लेकिन सरकार ने अपनी गलतियों का प्रायश्चित किया। भारत रत्न दिया, हम समझते हैं देर आए दुरुस्त आए।
खुद पर हमले के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह लोग आज से नहीं हजारों साल से इस देश के दलितों, पिछड़ों, गरीबों एवं मजलूमों पर हमला करते आए हैं। हमला करना उनकी आदत में है लेकिन हम मानवतावादी विचार के हैं, हमला करने वालों को भी माफ कर देते हैं। क्योंकि हमारी संस्कृति है। आगे बढ़ो और जो सामने आए उनको गले लगाओ। जो ईट पत्थर फेंके उसका भी स्वागत करो। हमारे महापुरुषों का इतिहास है, जो भी आगे चलने की कोशिश किया है। ऐसे ही अराजक तत्व हमेशा उन पर रोड़े बाजी करते रहे, विरोध करते रहे, समय-समय पर कीचड उछलते रहे, कभी-कभी गंदा भी फेंकते रहे, काला झंडा भी दिखाते रहे ईट पत्थर भी फेंकते रहे इसलिए मैं इसको अन्यथा नहीं समझता हूं। उनको सद्बुद्धि आए।
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