दो महारथी भिड़े कोई नही है कम,तुम डाल डाल, हम पात पात।
नई दिल्ली: ज़बानी लड़ाई किसी की भी हो, मज़ेदार तब होती है जब पक्ष और विपक्ष एक दूसरे की पोल खोलते है और जनता को पता चलता है कौन कितने पानी में है, एैसा ही कुछ देखने को मिला ओवैसी और शहनवाज़ हुसैन के बीच, यूपी के मुसलमानों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख AIMIM Chiefअसदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि भले ही बीजेपी सरकार 2022 तक सबको घर देने का दावा कर रही है , पर पिछले तीन सालों में यूपी में मुसलमानों को 10 घर भी सैंक्शन नहीं किए गए.ओवैसी ने कहा कि मैंने आरटीआई एक्ट के तहत एप्लीकेशन डालकर पूछा कि यूपी में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में पिछले तीन साल में कितने मुसलमानों को घर मिला. जो जवाब मिला उसके आधार पर मैं आज जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि साल 2018-19, 2019-20, 2020-21 इन तीन सालों में 10 घर भी किसी मुसलमान को सैंक्शन नहीं किए गए.
ओवैसी के इतना कहते ही भाजपा के मुस्लिम नेता और बिहार के उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन (Syed Shahnawaz Hussain) ने उन्हें इस बयान पर घेरते हुए कहा, कि ना जाने कैसी आरटीआई निकाल कर लाए हैं ओवैसी साहब… मैं उनको पूरी जानकारी देना चाहता हूं. आवंटित घरों की एक लिस्ट होती है. ऐसी हजारों लिस्ट हैं. मैं इन लिस्ट को उत्तर प्रदेश की सरकार से मंगाकर रजिस्ट्री डाक से से ओवैसीजी के घर पर भेज दूंगा, लेकिन वह उत्तर प्रदेश की इस जानकारी के बारे में बताएं कि उनका सोर्स क्या है. वह जाकर यूपी में यही क्यों तलाशते हैं कितने हिंदू को मकान मिला, कितने मुसलमान को मिला. यह नहीं देखते कि कितने गरीबों को मिला. उनसे मैं गुजारिश करूंगा कि गलत जानकारी ना दें. यह कार्यक्रम खत्म होते ही मैं उत्तर प्रदेश सरकार में फोन करूंगा और घरों की वह लिस्ट मंगा लूंगा, हम हिंदू मुस्लिम में फर्क नहीं करते.
इस पर शाहनवाज को जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा- मैंने तो आरटीआई एप्लीकेशन डाली है और पूछा है कि जो घर मुसलमानों को सैंक्शन किए, उनमें से केवल 10 घर का नाम बता दीजिए जिनमें मुस्लिम रह रहे हैं. घर सैंक्शन तो किए गए, पर दिए नहीं गए. ओवैसी ने शाहनवाज को यह भी सलाह दी कि वह कार्यक्रम खत्म होने के बाद मिनिस्ट्री ऑफ़ माइनॉरिटी अफेयर्स की वेबसाइट पर जाएं और उसमें एमएसडीपी (MSDP) के फंड के बारे में पढ़ लें. इसमें उत्तरप्रदेश को को 11 सौ करोड़ रुपए दिए गए थे. यूपी सरकार ने केवल 16 करोड़ खर्चा किया. इस मंच से इन दोनों नेताओं की चर्चा में और भी कई रोचक बातें वहां मौजूद अतिथियों को सुनने को मिलीं.
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