16,726 के बाद मेरठ में अगला क्या? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद MDA में बड़ा बदलाव
16,726 के बाद मेरठ में अगला क्या? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद MDA में बड़ा बदलाव
मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ अवैध निर्माण और आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल का विवाद अब मेरठ के लिए एक बड़े सवाल में बदल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के जोन-ए में चिन्हित 16,726 संपत्तियों पर सीलिंग के निर्देश दिए। लेकिन इस आदेश के बाद कहानी सिर्फ इन संपत्तियों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। अब निगाह इस बात पर है कि MDA बाकी तीन जोन में क्या खोजता है, कार्रवाई कैसे होती है और अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर तक तय होती है।
सेंट्रल मार्केट से निकली कहानी अब पूरे मेरठ तक पहुंची
मामला मूल रूप से शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट की उन संपत्तियों से जुड़ा था, जहां आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां और स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण का आरोप था। पहले चरण में 44 संपत्तियों पर कार्रवाई हुई। उपलब्ध अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार इनमें 20 में अवैध निर्माण पूरी तरह हटाया जा चुका है, जबकि बाकी 24 पर कार्रवाई का मुद्दा अभी अदालत की निगरानी में है।
इसके बाद MDA के सर्वे ने मामले का आकार अचानक बढ़ा दिया। जोन-ए में 16,726 संपत्तियां चिन्हित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन पर सीलिंग के निर्देश दिए। यानी जिस विवाद की शुरुआत कुछ दर्जन संपत्तियों से हुई थी, वह अब हजारों संपत्तियों तक पहुंच चुका है।
16,726 के बाद सबसे बड़ा सवाल—बाकी तीन जोन में क्या निकलेगा?
इस मामले की सबसे अहम अगली कड़ी जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी हैं। 21 सितंबर की सुनवाई में इन जोनों की रिपोर्ट अदालत के सामने नहीं रखी जा सकी। कोर्ट ने इन क्षेत्रों में भी ऐसी संपत्तियों की पहचान करने और अगली सुनवाई में स्थिति बताने को कहा है। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होनी है।
इसका मतलब साफ है—16,726 को मेरठ में कार्रवाई की अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता। बाकी जोनों के सर्वे के बाद सामने आने वाली तस्वीर इस पूरे मामले का अगला बड़ा अध्याय होगी।
दिलचस्प बात यह है कि MDA पहले ही अपने बड़े क्षेत्राधिकार में भवनों का सर्वे शुरू कर चुका था। अगस्त के अंत तक करीब 10 हजार भवनों का सर्वे पूरा होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि प्राधिकरण क्षेत्र में आठ लाख से अधिक भवन होने का अनुमान बताया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के सवालों के बाद MDA सचिव पर कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम में 23 सितंबर को एक और बड़ा मोड़ आया। शासन ने MDA सचिव अर्पित गुप्ता को पद से हटाकर लखनऊ संबद्ध कर दिया। ताजा रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनसे जोन-ए में पुराने निर्माणों और उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के संबंध में सवाल पूछे गए थे। रिपोर्टों में अधिकारियों के स्तर पर यह भी बताया गया कि कोर्ट के सामने MDA का पक्ष रखने को लेकर शासन ने गंभीरता दिखाई।
हालांकि सचिव को हटाए जाने के आधिकारिक प्रशासनिक कारण को लेकर अलग से स्पष्ट आदेश सार्वजनिक रूप से सामने आना जरूरी है। इसलिए इसे सीधे कोर्ट की कार्रवाई का परिणाम बताने के बजाय घटनाक्रम के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
उल्देपुर का सवाल भी बना बड़ी कड़ी
सुनवाई के दौरान उल्देपुर क्षेत्र में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने यह जानना चाहा कि ऐसे निर्माण और कॉलोनियां लंबे समय तक कैसे विकसित होती रहीं। रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने अधिकारियों से इस पर जवाब मांगा और आगे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
यही सवाल अब सिर्फ उल्देपुर तक सीमित नहीं रह जाता। यदि शहर के अलग-अलग हिस्सों में वर्षों पुराने निर्माण और व्यावसायिक उपयोग की जांच आगे बढ़ती है तो MDA को केवल भवनों की सूची नहीं, बल्कि नक्शे, भू-उपयोग, निर्माण की उम्र और अब तक हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सामने रखना होगा।
अब 9 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अगली सुनवाई तक MDA और संबंधित विभागों के सामने कई सवालों के जवाब तैयार करने होंगे—जोन-ए की 16,726 संपत्तियों पर कितनी कार्रवाई हुई, बाकी तीन जोनों में कितनी संपत्तियां चिन्हित हुईं, अवैध कॉलोनियों पर क्या कदम उठाया गया और पहले से कोर्ट के आदेशों के तहत चल रही कार्रवाई का कितना अनुपालन हुआ।
इसलिए मेरठ की इस कहानी में 16,726 का आंकड़ा अंतिम अध्याय नहीं, बल्कि अगली कार्रवाई का शुरुआती बिंदु बन गया है। अब असली परीक्षा अदालत के आदेश की घोषणा नहीं, बल्कि उसके जमीन पर लागू होने की है।
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