मेरठ शास्त्रीनगर में महिलाओं का बड़ा ऐलान, घर बचाने के लिए 7 दिन होगा सुंदरकांड पाठ
महिलाओं का ऐलान: ‘घर नहीं टूटने देंगे’, रविवार से शुरू होगा सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ
शास्त्रीनगर में ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का धरना जारी
मेरठ के शास्त्रीनगर सेक्टर-2 में आवास विकास परिषद की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में चल रहा आंदोलन अब धार्मिक स्वरूप लेने जा रहा है। अपने मकानों को बचाने की मांग को लेकर पिछले दो महीने से धरने पर बैठी महिलाओं ने शनिवार को पत्रकार वार्ता कर बड़ा ऐलान किया। महिलाओं ने कहा कि वे अपने घरों पर किसी भी तरह की आंच नहीं आने देंगी और इसी संकल्प के साथ रविवार से सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ का आयोजन करेंगी।
धरनास्थल पर आयोजित पत्रकार वार्ता में महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल मकानों को बचाने का नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और जीवनभर की पूंजी को सुरक्षित रखने का है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
65 दिनों से जारी है महिलाओं का धरना
धरने का प्रतिनिधित्व कर रहीं शीतल पुजानी ने बताया कि शास्त्रीनगर क्षेत्र में सेटबैक को लेकर चल रही कार्रवाई के विरोध में दर्जनों महिलाएं 10 अप्रैल से लगातार धरने पर बैठी हैं। धरने को अब 65 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि या जिम्मेदार अधिकारी की ओर से ऐसा आश्वासन नहीं मिला है, जिससे क्षेत्रवासियों की चिंताएं दूर हो सकें।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संवाद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इसी कारण महिलाओं ने अब धार्मिक मार्ग अपनाने का निर्णय लिया है।
रविवार से 27 जून तक होगा सुंदरकांड पाठ
महिलाओं ने बताया कि रविवार से 27 जून तक सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे धरनास्थल पर सुंदरकांड का पाठ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी और महिलाएं शामिल होंगी। उनका मानना है कि प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की कृपा से उनके घरों की रक्षा होगी और उनकी समस्याओं का समाधान निकलेगा।
महिलाओं ने क्षेत्र के लोगों से भी पाठ में शामिल होकर समर्थन देने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने आशियानों को बचाने का सामूहिक संकल्प है।
‘किसी भी कीमत पर घर नहीं टूटने देंगे’
पत्रकार वार्ता के दौरान महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी सूरत में अपने घरों को टूटने नहीं देंगी। उनका कहना है कि जिन मकानों में वे वर्षों से रह रही हैं, उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
महिलाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ के बाद भी उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है और कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता है, तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। इसके लिए आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय की जाएगी।
समाधान की उम्मीद में प्रभु शरण
धरनारत महिलाओं का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं मिलने के कारण अब उन्होंने धार्मिक आस्था का सहारा लिया है। उनका विश्वास है कि सुंदरकांड पाठ के माध्यम से सकारात्मक वातावरण बनेगा और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा। फिलहाल शास्त्रीनगर में चल रहा यह आंदोलन स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
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