36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए: मोदी सरकार की सख्त प्रत्यर्पण नीति और ऑपरेशन त्रिशूल का बड़ा असर

36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए: मोदी सरकार की सख्त प्रत्यर्पण नीति और ऑपरेशन त्रिशूल का बड़ा असर

36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए: मोदी सरकार की सख्त रणनीति और 'मिशन मोड' का बड़ा असर

नई दिल्ली | भारतीय वाणी न्यूज़ डेस्क

विदेशों में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियां चलाने, आर्थिक अपराध करने और कानून से भागने वाले अपराधियों के खिलाफ केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। देश के नेतृत्व और नीतिगत मार्गदर्शन के तहत वर्ष 2019 से 2026 तक दुनिया के 36 अलग-अलग देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश छोड़कर भागे अपराधी महज निष्क्रिय फाइलें नहीं हैं, बल्कि वे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए सीधे तौर पर लाइव थ्रेट्स (जीवंत खतरा) हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाते हुए 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया है।

2014 से पहले और अब: प्रत्यर्पण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, 2014 से पहले देश में प्रत्यर्पण से जुड़े कानून कालबाह्य हो चुके थे और भारत की केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। उस दौरान आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने या उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग से कठोर कानून मौजूद नहीं था।

  • 2004 से 2013 का दौर: उस समय एक वर्ष में औसतन केवल 4 भगोड़ों का ही प्रत्यर्पण हो पाता था, जबकि 110 से अधिक अनुरोध लंबित पड़े रहते थे।
  • जटिल प्रक्रिया व कमियां: अधूरे दस्तावेजों, धीमी कानूनी कार्यवाही और अंतर-विभागीय समन्वय की कमी के कारण विदेशी अदालतें भारत के अनुरोध खारिज कर देती थीं। कानूनी रुकावटों जैसे 'डबल जियोपार्डी' (दोहरे अभियोजन से बचाव) और 'डुअल क्रिमिनैलिटी' (दोहरे अपराध के सिद्धांत) के कारण भारत के प्रत्यर्पण आवेदन रद्द हो जाते थे।
  • इरादों की कमी: पहले की सरकारों में राजनीतिक इच्छाशक्ति (Political Will) का अभाव था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे सीधे देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर प्राथमिकता दी है।

तीन स्तंभों पर टिकी नई रणनीति: वैश्विक अभियान, समन्वय और कूटनीति

भगोड़ों के खिलाफ भारत ने एक एकीकृत, खुफिया-आधारित (Intelligence-led) और तकनीक से लैस (Technology-driven) मॉडल विकसित किया है। इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  1. ग्लोबल ऑपरेशन्स (वैश्विक अभियान)
  2. मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय
  3. स्मार्ट कूटनीति (Smart Diplomacy)

तकनीक का इस्तेमाल: 'ऑपरेशन त्रिशूल' और 'भारतपोल' से मिली रफ्तार

विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे अपराधियों की सही लोकेशन को ट्रैक करने के लिए 'ऑपरेशन त्रिशूल' की शुरुआत की गई। इसके तहत सैटेलाइट डेटा, डिजिटल फुटप्रिंट और उन्नत जीयो-लोकेशन ट्रैकिंग तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

इसके अलावा, अंतर-एजेंसी सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए 'भारतपोल' (Bharatpol) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश की 1,400 से अधिक जांच व सुरक्षा एजेंसियों को इंटरपोल (INTERPOL) से सीधे जोड़ा गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि जो सूचना साझा करने में महीनों का समय लगता था, वह घटकर अब मात्र 3 से 10 दिनों में पूरा हो जाता है।

पिछले 3 वर्षों में INTERPOL के जरिए रिकॉर्ड 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ 'रेड कॉर्नर नोटिस' (Red Corner Notice) जारी करवाए गए हैं।

कानूनी शिकंजा: नए कानून और 'ट्रायल इन एब्सेंशिया'

भगोड़ों को कानून के दायरे में लाने के लिए कानूनी ढांचे को पूरी तरह मजबूत किया गया है:

  • FEOA अधिनियम: 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (Fugitive Economic Offenders Act) लागू किया गया।
  • NIA व UAPA संशोधन: 2019 में NIA और UAPA कानूनों में किए गए संशोधनों के बाद आतंकी नेटवर्क, विदेशों में बैठे हैंडलर्स, फंडिंग सिस्टम और सपोर्ट नेटवर्क को टारगेट करना आसान हुआ।
  • नए आपराधिक कानून (BNSS): वर्ष 2024 में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के अंतर्गत पहली बार 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' (Trial in Absentia) का प्रावधान किया गया। इसका मतलब है कि यदि भगोड़ा विदेश में छिपा है, तब भी उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाकर अभियोजन और सजा की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

आर्थिक भगोड़ों पर प्रहार: ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त, ₹18,762 करोड़ वापस

आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वालों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कड़ी कार्रवाई की गई है:

  • संपत्ति जब्ती: वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है।
  • सफल वापसी (Restitution): इसी अवधि के दौरान बैंकों और पीड़ितों के ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी (Restitution) कराई गई है।

टेरर, नारकोटिक्स और खालिस्तानी चरमपंथ पर कसता शिकंजा

भारत सरकार का यह प्रत्यर्पण अभियान केवल आर्थिक अपराधियों तक सीमित नहीं है। इसका दायरा आतंकवाद, प्रो-खालिस्तान एक्सट्रीमिसम (PKE), गैंगस्टर-टेरर सिंडिकेट, नारकोटिक्स नेटवर्क, साइबर फ्रॉड और जाली भारतीय मुद्रा (FICN) के नेटवर्क तक फैला हुआ है।

मुंबई 26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के लंबे कानूनी और कूटनीतिक प्रयासों का बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में विदेशों से संचालित होने वाले क्रॉस-बॉर्डर टेरर और नारको-टेरर नेटवर्क पर भी इस कार्रवाई से गहरा प्रहार हुआ है।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram