मथुरा की सियासत में बड़ा उलटफेर, कांग्रेस में लौट सकते हैं आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा !
मथुरा की सियासत में बड़े उलटफेर की आहट, कांग्रेस में लौट सकते हैं आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा
मथुरा। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। मथुरा की मांट विधानसभा सीट से आठ बार विधायक रहे और पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री पंडित श्याम सुंदर शर्मा के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, अभी कांग्रेस में उनकी वापसी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है और मामला फिलहाल सूत्रों के हवाले से चर्चा में है।
आठ बार विधायक रहे श्याम सुंदर शर्मा कौन हैं?
श्याम सुंदर शर्मा मांट विधानसभा सीट की राजनीति का लंबे समय तक प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने 1989 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। इसके बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ उनका सफर जारी रहा। 2002 में वह मायावती सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री भी रहे।
2012 में वह राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी से चुनाव हार गए थे, लेकिन बाद में हुए उपचुनाव में जीतकर फिर विधानसभा पहुंचे। 2017 में उन्होंने बसपा के टिकट पर मांट से चुनाव जीता।
2022 में पहली बार भाजपा ने छीनी मांट सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मांट सीट पर पहली बार जीत दर्ज की। भाजपा के राजेश चौधरी को 83,958 वोट मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी श्याम सुंदर शर्मा को 74,378 वोट मिले। दोनों के बीच 9,580 वोट का अंतर रहा। कांग्रेस प्रत्याशी को इस चुनाव में 1,281 वोट मिले थे।
यानी 2022 के चुनाव में भाजपा ने लंबे समय से श्याम सुंदर शर्मा के प्रभाव वाली मांट सीट पर अपना राजनीतिक आधार स्थापित किया।
बसपा से निष्कासन के बाद नई सियासी राह
अक्टूबर 2024 में बसपा ने श्याम सुंदर शर्मा को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया था। इसके बाद से उनकी अगली राजनीतिक पारी को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं।
अब सूत्रों के हवाले से कांग्रेस में उनकी वापसी की संभावना की चर्चा ने मथुरा की सियासत को फिर गरमा दिया है। हालांकि, कांग्रेस या स्वयं श्याम सुंदर शर्मा की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आराधना मिश्रा को यूपी कांग्रेस की कमान, ब्राह्मण समीकरण पर नजर
श्याम सुंदर शर्मा की संभावित कांग्रेस वापसी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया है।
आराधना मिश्रा को कांग्रेस के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिना जाता है। वहीं सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी ने देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
कांग्रेस के इस बदलाव को अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश संगठन की कमान देने के बाद श्याम सुंदर शर्मा जैसे पुराने ब्राह्मण नेता की कांग्रेस में वापसी पार्टी की इसी रणनीति का हिस्सा बन सकती है?
हालांकि, केवल किसी नेता की नियुक्ति या वापसी के आधार पर पूरे ब्राह्मण समाज के राजनीतिक रुख में बदलाव का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
कांग्रेस को क्या फायदा, भाजपा के सामने क्या चुनौती?
अगर श्याम सुंदर शर्मा कांग्रेस में शामिल होते हैं तो कांग्रेस को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक अनुभवी और लंबे समय से मांट की राजनीति में सक्रिय रहे नेता का साथ मिल सकता है। उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान और पुराने संपर्क कांग्रेस के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
दूसरी ओर भाजपा के लिए चुनौती यह होगी कि जिस मांट सीट पर पार्टी ने 2022 में पहली बार जीत दर्ज की, वहां श्याम सुंदर शर्मा फिर से सक्रिय राजनीति में लौटते हैं। हालांकि, 2022 के चुनाव में भाजपा की जीत यह भी बताती है कि पार्टी ने मांट में अपना संगठनात्मक और चुनावी आधार बनाया है।
क्या फिर बदलेगा मांट का सियासी समीकरण?
श्याम सुंदर शर्मा की राजनीति का इतिहास बताता है कि वह लंबे समय तक मांट की सियासत में प्रभावशाली रहे हैं और कई राजनीतिक दलों के साथ उनका सफर रहा है। इसलिए कांग्रेस में उनकी संभावित वापसी को सिर्फ एक दल-बदल के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा वास्तव में कांग्रेस का हाथ थामते हैं। अगर ऐसा होता है तो आराधना मिश्रा 'मोना' के नेतृत्व में कांग्रेस की नई प्रदेश टीम, श्याम सुंदर शर्मा की वापसी और पश्चिमी यूपी की राजनीति—इन तीनों का मेल 2027 से पहले नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा को जरूर तेज कर सकता है।
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