भूधंसाव से ढह रहा जोशीमठ, यह भवन फिर भी खड़ा है स्थिर...

भूधंसाव से ढह रहा जोशीमठ, यह भवन फिर भी खड़ा है स्थिर...

भूधंसाव जैसे आपदा से जोशीमठ नगर में हर ओर हाहाकार मचा हुआ है। दरारें आने से सबके संजोये आशियाने धराशायी हो रहे हैं। वहीं, इसी नगर में एक ऐसा भी भवन है, जो पूरी शानो-शौकत के साथ खड़ा है और अभी भी इस भूधसांव से बचा हुआ है। इस इमारत में अब तक कोई दरार नहीं आR है। यह भवन पौराणिक ज्योतिर्मठ का है, जो एक बार भूकंप में धराशायी हो गया था, लेकिन जीर्णोद्धार होने के बाद से सुरक्षित है और अब तक भूकंप के कई बड़े झटके झेल चुका है।

जोशीमठ का प्रत्येक वार्ड, कस्बा, मोहल्ला इन दिनों भूधसांव जैसी आपदा से जूझ रहा है। कुछ वर्षों में बने नए मकानों में भी दरारें आ गई हैं और लोगों को मजबूरी में अपने घरों को छोड़ना पड़ रहा है। जो मकान ज्यादा खतरनाक हो गए हैं, उनको ध्वस्त भी किया जा रहा है और लोग अपने घरों को टूटता देख कर रो रहे हैं। मकानों के ध्वस्तीकरण के बीच जोशीमठ में एक ऐसा पौराणिक भवन है, जो आज भी ज्यों का त्यों ही खड़ा है। इसका जीर्णोद्धार करते समय इस भवन में शीशम और देवदार की लकड़ियों के साथ ही मिट्टी और पत्थर का प्रयोग किया गया था।

आज से लगभग 80 साल पहले स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने भवन का जीर्णोद्धार कराया था। वर्तमान में इस भवन की व्यवस्थाएं देख रहे स्वामी रामानंद सरस्वती बताते हैं कि जीर्णोद्धार के बाद से यह भवन आज तक सही-सलामत है। बताया कि इन 80 वर्षों में कई बार भूकंप आया, लेकिन इस भवन पर कोई आंच नहीं आई। बताया कि आदि शंकराचार्य ने यहां से कुछ दूरी पर तपस्या की थी। तब उन्होंने यहां पर ज्योतिर्मठ की स्थापना की थी। 1776 में जब जबरदस्त भूकंप आया था तो तब आदि शंकराचार्य द्वारा बनाया गया यह मठ भी भूकंप की चपेट में आ गया था और काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गया था। तब 1943 में स्वामी ब्रह्माहनंद सरस्वती द्वारा इस मठ का जीर्णोद्धार कराया गया। तब 167 वर्षों तक शंकराचार्य की गद्दी खाली रही। वहीं, इन 80 वर्षों में आए भूकंप के कई झटकों को झेलने के बाद भी यह भवन सुरक्षित खड़ा है। इस भवन में मंदिर भी है जहां स्थानीय लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।पहली मंजिल पर चलने से हिलता हुआ महसूस होता है भवन

स्थानीय लोगों के अनुसार जब वे लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं तो पहली मंजिल पर चलने से लगता है कि मठ का भवन पूरी तरह से हिल रहा है। इस भवन की बनावट पौराणिक वास्तु के अनुसार की गई है, जो आश्चर्यजनक है। भवन के आसपास के कई भवनों पर दरारें आ गई हैं, लेकिन इस इमारत पर किसी प्रकार की दरार नहीं है। यह हिल रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें कोई दरार है। इसकी बनावट ही ऐसी है।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram