फर्जी मौत, फर्जी लाश और फर्जी पोस्टमार्टम: 6 करोड़ के बीमा घोटाले की चौंकाने वाली साजिश का पर्दाफाश
फर्जी मौत, फर्जी लाश और फर्जी पोस्टमार्टम… 6 करोड़ के बीमा घोटाले की चौंकाने वाली साजिश
महाराष्ट्र के मालेगांव से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है। यहां कुछ लोगों ने एक ऐसे व्यक्ति की “दूसरी मौत” रच दी जो पहले ही मर चुका था, और मकसद था करोड़ों रुपये का बीमा हड़पना। इस हैरान कर देने वाले मामले में फर्जी FIR, फर्जी पोस्टमार्टम और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तक तैयार कर दी गईं।
पहले हुई असली मौत… फिर रची गई दूसरी मौत की कहानी
मालेगांव निवासी राजेंद्र शालिंदर जाधव की 23 फरवरी 2024 को बीमारी के कारण मौत हो गई थी। परिवार में शोक का माहौल था, लेकिन कुछ समय बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया।
बताया जा रहा है कि कुछ बीमा एजेंट मृतक की पत्नी अरुणा जाधव के संपर्क में आए और उन्हें करोड़पति बनने का लालच दिया। यहीं से शुरू हुई एक ऐसी साजिश, जिसमें पुलिस, डॉक्टर और एजेंट तक शामिल हो गए।
मर चुके व्यक्ति के नाम पर करवा दीं करोड़ों की बीमा पॉलिसी
साजिश के तहत पहले से मर चुके राजेंद्र जाधव को कागजों में जिंदा दिखाया गया। इसके बाद उनके नाम पर करीब 6.12 करोड़ रुपये की कुल 8 बीमा पॉलिसी करवा दी गईं।
प्लान यह था कि कुछ समय बाद एक “दुर्घटना” दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये का क्लेम लिया जाएगा।
एक साल बाद रचा गया एक्सीडेंट का ड्रामा
साजिश के अगले चरण में 19 अप्रैल 2025 को एक फर्जी सड़क हादसा दिखाया गया। पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई कि एक ब्लैक थार गाड़ी ने बाइक को टक्कर मार दी, जिसमें राजेंद्र शालिंदर जाधव की मौत हो गई।
इस झूठी कहानी को सच साबित करने के लिए चार पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर फर्जी FIR दर्ज कर दी।
बिना लाश के हो गया पोस्टमार्टम!
मामले को और पुख्ता बनाने के लिए कुछ डॉक्टरों से संपर्क किया गया। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी शव के ही कागजों में पोस्टमार्टम कर दिया गया।
डॉक्टरों ने कथित तौर पर झूठी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर दी, जिससे यह साबित किया जा सके कि हादसे में मौत हुई है। बताया जा रहा है कि इस काम में चार डॉक्टरों ने भी पैसे लिए।
बीमा कंपनी ने कर दिया भुगतान… लेकिन एक गलती ने खोल दी पोल
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक बीमा कंपनी ने 10 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया। दूसरी कंपनी से करीब 50 लाख रुपये मिलने ही वाले थे।
लेकिन तीसरी बीमा कंपनी ने जब जांच के लिए मृतक के घर का सर्वे किया, तो वहां एक ऐसी चीज मिली जिसने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।
घर के कमरे में राजेंद्र जाधव की तस्वीर टंगी थी, और उसके नीचे मौत की तारीख 23 फरवरी 2024 लिखी हुई थी। जबकि बीमा क्लेम में मौत की तारीख 19 अप्रैल 2025 के एक्सीडेंट में दिखाई गई थी।
यहीं से बीमा कंपनी को शक हुआ और मामला खुलने लगा।
IPS अधिकारी की जांच में खुली पूरी साजिश
दरअसल उत्तर प्रदेश की IPS अधिकारी अनुकृति शर्मा, जो देशभर में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के बीमा घोटालों की जांच कर रही हैं, उनके पास भी यह मामला पहुंचा।
उन्होंने जब बारीकी से जांच की तो फर्जी मौत, फर्जी FIR और फर्जी पोस्टमार्टम की पूरी साजिश सामने आ गई। इसके बाद पूरी रिपोर्ट महाराष्ट्र के जलगांव पुलिस अधीक्षक को भेजी गई।
पुलिस ने 9 आरोपियों को किया गिरफ्तार
जांच के बाद जलगांव पुलिस ने इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मृतक की पत्नी, उसका भाई, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और बीमा एजेंट शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- अरुणा जाधव (मृतक की पत्नी)
- मिथुन जाधव (मृतक का भाई)
- डॉक्टर मंदार कालवेकर
- महेंद्र पाटिल (पुलिसकर्मी)
- रविंद्र बत्तीशे (पुलिसकर्मी)
- सचिन निकम (पुलिसकर्मी)
- सुनील निकम (पुलिसकर्मी)
- प्रवीण पाटिल (बीमा एजेंट)
- प्रेम पाटिल (बीमा एजेंट)
सिस्टम पर भी उठे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना शव के पोस्टमार्टम कैसे हो गया? पुलिस ने बिना जांच के FIR कैसे दर्ज कर ली? और बीमा पॉलिसी किस तरह जारी हो गई?
मालेगांव का यह मामला अब सिर्फ बीमा धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में मौजूद खामियों और भ्रष्टाचार की बड़ी कहानी बन गया है।
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