भगवान काल भैरव जयंती पर करे ऐसे विशेष पूजा मिलेगा ये लाभ
Kaal Bhairav काल भैरव जन्माेत्सव
भगवान कालभैरव को महादेव का रौद्र रूप माना गया है। ऐसा माना जाता है कि काल भैरव की पूजा करने से सभी रोगों और दुखों से निजात मिल जाता है। इसके अलावा इनकी पूजा करने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है, कष्टों का निवारण होता है। काल भैरव का अर्थ ही यही होता है, यानि कि जो काल और भय से आपकी रक्षा करता हो। ऐसा माना जाता है कि अगर आपके अंदर किसी बात को लेकर डर है, तो आप काल भैरव का स्मरण कीजिए। काल भैरव के स्मरण मात्र से ही आपके अंदर डर पर विजय पाने की शक्ति आ जाएगी। सनातन काल से ही हिंदू धर्म में श्री काल भैरव की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है।
– इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान कर साफ वस्त्रों को धारण करना चाहिए. – इसके बाद भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. – उन्हें काले तिल, उड़द अर्पित करना चाहिए. – मंत्रों का जाप करते हुए विधिवत पूजा करना चाहिए
– बिल्वपत्रों पर सफेद या लाल चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर शिव लिंग पर चढ़ाना चाहिए.
– मान्यता के अनुसार भैरव जी का वाहन कुकुर यानी कुत्ते को माना गया है इसलिए काल भैरव जयंती पर काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ के पुए खिलाना चाहिए.
– इस दिन किसी भी कालभैरव मंदिर में जाकर गुलाब, गूगल की खुशबूदार अगरबत्ती और चंदन चढ़ाना चाहिए. नींबू की माला भी भैरवजी को चढ़ाना चाहिए.
– कालभैरवाष्टक का पाठ करने से ऊपरी बाधाएं, भूत-प्रेत की परेशानी दूर होती है.
– इस दिन गरीबों को दान देना काफी शुभ माना जाता है.
काल भैरव मंत्रों का करें जाप
ॐ कालभैरवाय नम:’
ओम भयहरणं च भैरव:। ओम कालभैरवाय नम:। ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं। ओम भ्रं कालभैरवाय फट्।
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!
भैरव जी की आरती (Kaal Bhairav Aarti)
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।
भैरव जी की आरती जो कोई नर गावें।
कहत धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. भारतीय वाणी वेबसाईट इनकी पुष्टि नहीं करती है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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