सर पर हिजाब और हाथो में रामध्वज पकडे मुंबई की शबनम शेख अयोध्या के लिए पैदल ही निकली
पूरा देश इस वक़्त भगवान् रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस कार्यक्रम में जंहा देश का हिन्दू समाज बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है वही मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें अपनी हिस्सेदारी निभा रहे है ऐसे ही एक मुस्लिम महिला अयोध्या में प्रभु रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अपनी भागेदारी करने के लिए मुंबई से अयोध्या के लिए पैदल ही रवाना हो गयी है मुंबई से पैदल ही निकल पड़ी शबनम शेख इस वक़्त उत्तर प्रदेश के महोबा से निकल रही है।
1350 किलोमीटर के सफर में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के रास्ते महोबा पहुंची शबनम शेख का जनपद के हिन्दू संगठन ने जोरदार स्वागत किया। 20 वर्ष की शबनम बचपन से ही भगवान राम में आस्था रखती चली आई है और इस कठिन पैदल यात्रा में उसके पैरों में छाले पड़ चुके हैं, लेकिन उसकी आस्था के सामने यह छाले बौने नजर आ रहे हैं। शबनम अपने दोस्तों के साथ भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होकर अपने भाव को उनके सामने रखना चाहती है। सफर में तमाम दुश्वारियों के बीच शबनम के चेहरे में ना थकान दिखाई दी और ना ही उसके चेहरे में कोई मायूसी है। राम नाम और राम भजन गाते हुए शबनम अपने सफ़र को आसान बना रही है।
महाराष्ट्र के मुंबई में रहने वाली शबनम शेख की सर में हिजाब बांधे है साथ ही शबनम शेख हाथ में भगवान राम की ध्वज पताका लेकर अयोध्या की तरफ चलती जा रही है। इस पूरी यात्रा में शबनम शेख अपने दोस्तों के साथ 1578 किलोमीटर के कठिन सफर तय करेगी। इस वक़्त उत्तर प्रदेश में कड़ाके की सर्दी पद रही है लेकिन औशबनम लगातार चलती जा रही है। रास्ते में थकावट होने के चलते सड़क किनारे बैठी शबनम अपने पैरों पर पड़ चुके छालों की तकलीफ को मिटाने की नाकाम कोशिश कर रही हैं तो वही पैरों में उठ रहे दर्द को अपने ही हाथों से दबाकर काम करने की भी कोशिश शबनम करती दिखाई दी हैं।
शबनम बताती है कि उसके पैरों में छाले पड़ चुके हैं तो पैरों का दर्द भी असहनीय हैं मगर प्रभु राम से अपार स्नेह और लगन के चलते यह दर्द भी उसे महसूस नहीं हो रहा शायद यही वजह है कि शबनम बिना रुके बिना थके भगवान राम के दरबार जाने के लिए चली जा रही है। शबनम कहती है कि उसके मन में प्रभु राम से अपार स्नेह और लगन लग चुकी है। इसी के तहत वह 500 वर्षों बाद भगवान राम के अयोध्या में आगमन होने पर इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनना चाहती है। वह बताती है कि उसके मन में बहुत सारे भाव हैं जो भगवान राम के दरबार में पहुंचकर वह व्यक्त करेंगी। रस्ते में मिल रहे रामभक्तो के प्रेम मिलता है तो यात्रा के लिए भी नयी ऊर्जा मिल जाती है।
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