इसी स्कैच के आधार पर बना है अयोध्या में श्री रामलला का विग्रह
मऊ: उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ की पहचान महर्षि वाल्मिकी की तपस्थली के रूप में जानी जाती है। कहते है त्रेता युग में उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में तमसा नदी के किनारे महर्षि बाल्मीकि ने रामायण ग्रंथ की रचना की थी जिसके माध्यम से मर्यादा पुरषोत्तम प्रभु श्रीराम का गुणगान किया था जिससे उनकी ख्याति तीनों लोको में फैल गई ।
महर्षि बाल्मीकि की तपोस्थली से आने वाले डॉ सुनील विश्वकर्मा ने अयोध्या में स्थापित भगवान राम की मूर्ति का स्क्रेच बनाया था जिसके आधार पर भगवान राम की मूर्ति को बनाया गया है। सुनील के इस कार्य की वजह से एक बार फिर चर्चा का विषय हो गया है।
भगवान राम और मऊ का संबंध त्रेता युग से चला आ रहा है। यहां बहने वाली तमसा नदी के किनारे ही महर्षि बाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी । जिसका उल्लेख तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस की अयोध्या काण्ड की चौपाई में भी किया गया है।

"बालक वृद्ध विहाई गृह लगे सब साथ
तमसा तीर निवासु किय प्रथम दिवस रघुनाथ॥ 84 "
अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही जनपद मऊ के कोपागंज ब्लॉक के रहने सुनील विश्वकर्मा की चर्चा हो जोरो पर हो रही है । सुनील विश्वकर्मा ने अयोध्या में स्थापित प्रभु श्रीराम रामलला के विग्रह का निर्माण का स्कैच बना कर महर्षि बाल्मीकि की तपोस्थली का नाम रोशन किया है।
मऊ निवासी सुनील विश्वकर्मा काशी विद्यापीठ,में ललित कला विभाग के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत है इनके द्वारा बनाये गए चित्र के आधार पर रामलला की मूर्ति के विग्रह बनाया हुआ है। जैसे ही जनपद के लोगो को पता चला कि भगवान श्री रामलला के विग्रह का स्कैच मऊ निवासी कलाकार के द्वारा बनाया गया है तभी से लोग उनके परिजनों को व डा. सुनील को बधाई दे रहे है।
नगर पंचायत कोपागंज मुहल्ला हुंसापुरा निवासी सुनील विश्वकर्मा की प्रारम्भिक शिक्षा कोपागंज में हुई है। बापू इण्टर कालेज कोपागंज से इन्होंने हाईस्कूल व इण्टर मीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण किया तत्पश्चात वे बीएफए की शिक्षा के लिए बीएचयू वाराणसी गए। वहा से बीएफए व एमएफए में गोल्ड मेडलिस्ट हुए । एम फिल आगरा से किया। एडवांस्ड स्टडी इन पेंटिंग चाइना से किया। यूजीसी नेट 2006 में क्वालीफाई किया । इसके बाद महात्मा गॉंधी काशी विद्यापीठ में ललित कला विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे। वर्तमान में महात्मा गॉंधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के ललित कला विभाग में अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।
डा. सुनील विश्वकर्मा राष्ट्रीय चित्रकला संयोजक, संस्कार भारती, सदस्य दिल्ली ललित कला एकेडमी के पद पर भी हैं। इनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में राज्य एकेडमी पुरस्कार 2013, राष्ट्रीय एकेडमी पुरस्कार 2016 व अंतर्राष्ट्रीय चित्रकला पुरस्कार 2018 भी रहा है।
सुनील के भाई और मां ने बताया कि उन्हें बहुत खुशी है की भगवान राम की मूर्ति के स्क्रेच को बनाने के लिए कुल 84 लोगो ने स्क्रेच बनाए थे जिसमे से तीन लोगो का स्क्रेच सेल्क्ट किया गया था फिर दिल्ली बुलाया गया उसके बाद सुनील विश्वकर्मा का स्कैच फाइनल हुआ था। और इनसे यह कहा गया था वह इसकी जानकारी किसी को नहीं देंगे । लेकिन आज यह जानकारी जब लोगो को हुई तो लोगो में खुशी लहर दौड़ गई ।
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