तान्या मोटर्स पर अवैध बिजली कनेक्शन का आरोप, अधिवक्ता ने PVVNL से कड़ी कार्रवाई की मांग की
मेरठ के तान्या मोटर्स पर अवैध बिजली कनेक्शन और विभागीय भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप। अधिवक्ता ने PVVNL से कार्रवाई की मांग की। मामला जन-सुरक्षा और राजस्व हानि से जुड़ा, उच्चस्तरीय जांच की मांग।
मेरठ। नगर के प्रतिष्ठित वाहन विक्रेता तान्या मोटर्स (नेक्सा शोरूम, छिप्पी टैंक) पर बिजली अधिनियमों के गंभीर उल्लंघन और विभागीय मिलीभगत का आरोप लगा है। मेरठ निवासी अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के प्रबंध निदेशक को भेजी शिकायत में दावा किया है कि शोरूम संचालक हर्ष गर्ग ने दो अलग-अलग कनेक्शनों के जरिये अवैध रूप से बिजली की आपूर्ति ले रखी है, जिससे न सिर्फ राजस्व को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि पूरे इलाके की जन-सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
शिकायत के मुख्य बिंदु
वैध HT कनेक्शन – 52 kVA का उच्चदाब ट्रांसफॉर्मर-युक्त कनेक्शन व्यवसायिक प्रयोजन के लिए स्वीकृत है, पर वास्तविक लोड की जांच की मांग की गई है।
अवैध LT कनेक्शन – 54 kW का लो-टेंशन कनेक्शन सीधे विद्युत पोल से जोड़ा गया बताया गया है, जो CEA रेगुलेशन-2013 के तहत 50 kW से ऊपर प्रतिबंधित है।
कानूनी धाराएँ – शिकायत में भारतीय विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-126 (अनाधिकृत उपयोग) व धारा-135 (बिजली चोरी) के साथ-साथ उपविद्युत आपूर्ति कोड-2005 के उल्लंघन का हवाला दिया गया है। दोष सिद्ध होने पर लाखों रुपये जुर्माना और तीन वर्ष तक कारावास का प्रावधान है।
जन-सुरक्षा और भ्रष्टाचार का सवाल
शर्मा के अनुसार, 54 kW लोड वाले अवैध LT कनेक्शन से शॉर्ट-सर्किट और आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। शिकायत में दावा है कि यह अनियमितता विभागीय अभियंताओं, बिलिंग स्टाफ और मीटरिंग शाखा की “मिलीभगत या घोर उदासीनता” के बिना संभव नहीं थी।
माँगी गई कार्रवाई
1. अवैध कनेक्शन तत्काल काटने और राजस्व हानि की वसूली।
2. HT कनेक्शन की क्षमता एवं वास्तविक उपयोग का ऑडिट।
3. दोषी अधिकारियों के खिलाफ निलंबन-सहित विभागीय व आपराधिक कार्रवाई—भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 और IPC धारा-409, 120-B के तहत FIR।
4. स्वतंत्र तकनीकी समिति बनाकर स्वीकृति प्रक्रिया, बिजली बिल व नक्शों की जांच।
PVVNL मुख्यालय स्तर पर शिकायत प्राप्त हो चुकी है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि “मामला गंभीर प्रतीत होता है, प्रथम दृष्टया जाँच के आदेश शीघ्र जारी किए जाएंगे।”
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह प्रकरण न केवल मेरठ मंडल में बिजली चोरी के खिलाफ एक नजीर बन सकता है, बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार पर भी बड़ी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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