अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीपक जलाने वाले गुरुओं को नमन

अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीपक जलाने वाले गुरुओं को नमन

Teachers day: जो अंधकार से हमें प्रकाश की तरफ ले जाए वही तो गुरु होता है, जिसकी सीख पर कभी किसी को शक ना हो वही तो शिक्षक होता है,

बहुत देर और सहनशक्ति की जरूरत होती है एक शिक्षक होने के लिए,

बीते सालों में शिक्षक और छात्र के रिश्ते में कई बदलाव आए हैं पहले जहां अध्यापक के सामने बच्चों के मुंह नहीं करते थे आज से आराम से अपनी परेशानियों को शिक्षकों से शेयर करते हैं, इसको और दूसरे शिक्षण संस्थानों में इस खास दिन को बड़ी धूमधाम से और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।गुरू के सामने हम जितना खाली होकर

जाते हैं वह हमें उतना ही भर देते हैं, अगर गुरु के सामने ज्ञान का घमंड किया तो वह आपके मन की स्लेट पर कभी कुछ नहीं लिख पाएंगे….इसलिए उन शिक्षकों को सलाम करें जिन्होंने हमें गढ़ा है, रचा है, बनाया है… जिनकी वजह से आज हम इस काबिल हैं कि अपनी आजीविका चला पा रहे हैं….

गुरु सिर्फ वही नहीं है जो स्कूलों में पढ़ा रहे हैं जीवन में हम कभी भी कोई भी बात किसी से भी सीख सकते हैं.. चाहे वह हमारे घरों में काम करने वाले ही क्यों न हो… हम बहुत सारे लोगों से सीखते हैं, सीखना चाहिए…लेकिन सीखने की दिशा वही होना चाहिए जो समाज हित में हो, देशहित में हो…स्वयं आपके और परिवार के हित में हो…

गुरु हमारे विचारों को, संस्कारों को, सोच और आचरण को प्रभावित करते हैं, वे हमें बताते हैं कि हमारे लिए सही क्या है और गलत क्या, शिक्षक दिवस पर हमें अपने हर तरह के शिक्षकों को सलाम करना चाहिए….गुरु को

जरूर याद करें जब हम जीवन में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हैं… क्योंकि गुरु हमें गढ़ते हैं ।

शिक्षक दिवस यानी शिक्षकों का सम्मान दिवस आचार्य देवो भव: का बोध वाक्य सुनकर हम बड़े हुए हैं ।

शिक्षक दिवस यानी शिक्षकों का सम्मान दिवस।

यह दिवस पूरे देश में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह हमारे देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस है।

राधाकृष्णन ने चालीस वर्षों तक शिक्षण कार्य किया था। वह महान शिक्षक तो थे ही, साथ में शिक्षक और छात्रों के उत्तम समन्वयक भी थे। उन्होंने अपने जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को सम्मान दिलाना था।

डॉ. राधाकृष्णन शिक्षा और शिक्षक जगत के मसीहा थे। उनके विचार थे कि यदि देश का प्रत्येक शिक्षक अपने धर्म का पालन करे तो पूरा देश अशिक्षा और अज्ञान से मुक्त हो जाएगा। शिक्षक अर्थात गुरु का अर्थ है ‘अंधकार दूर करने वाला’। ‘गु’ का अर्थ है ‘अंधकार’ और ‘रु’ का अर्थ है ‘मिटाने वाला’। आदर्श शिक्षक अपने शिष्यों के हृदय में अच्छे संस्कारों और ज्ञान का सृजन करता है।

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Comments

  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram