न तो डाकू रहे, न अंग्रेजों का शासन...लूटपाट करने के बाद लेते थे रॉबर्स केव में पनाह

न तो डाकू रहे, न अंग्रेजों का शासन...लूटपाट करने के बाद लेते थे रॉबर्स केव में पनाह

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित है रॉबर्स कैव यानी गुच्चू पानी। गूच्चू पानी के इतिहास में बेहद ही रचनात्मक और थोड़ी सी डरावनी कहानियां हैं।

आइए जानते हैं इससे जुड़ी वो कहानी जो बहुत कम लोग ही जानते हैं। गुच्चू पानी देहरा के पठार में विशाल चूना पत्थर वाले क्षेत्र में स्थित है। देहरादून की सहस्त्रधारा में भी आप इसी तरह की गुफाएं देख सकते हैं। गुच्चू पानी एक संकीर्ण कण्ठ यानी नेरो गेज गुफा है, यह क्षेत्र चुना पत्थर निर्माण का एक उदाहरण भी है। कहा जाए तो रॉबर्स कैव एक अद्भुत गुफा है जो कि लगभग 650 मीटर लंबी और काफी सक्रिय कहे जाने वाली अद्भुत गुफा के साथ ही साथ डरावनी और रहस्यपूर्ण भी है। यह गुफा प्राकृतिक सुंदरता के परिदृश्यों से भरी हुई है। यहां छोटे छोटे कई झरने भी है, जहां आप स्नान कर सकते हैं।

गूच्चू पानी में काफी संख्या में दूर-दूर से पर्यटक आते हैं और इस गुफा में बहते झरने घुटनों से नीचे तक के पानी में अपना समय बिताते ही नहीं बल्कि गर्मी से राहत भी पाते हैं। इस गुफा के चारों तरफ से पानी की धाराएं निकलती है और यह पानी इतना साफ और स्वच्छ है कि चांदी की तरह इस पानी में पत्थर भी चमकते रहते हैं। कहा जाए तो गुच्चू पानी में एक उथला जल स्तर है। अधिकतम पानी आपके घुटने को छूएगा। यहां पानी में डूबने का बिलकुल भी डर नहीं है। छोटे बच्चे और महिलाएं निडर होकर नहाने का आनंद ले सकते है।

गर्मियों में गुच्चू पानी में घूमने का सबसे अच्छा समय सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक का है। गर्मी के मौसम में घूमने के लिए गुच्चू पानी सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है। आप मार्च से जून तक यहां आ सकते हैं लेकिन बारिश के मौसम में यहां आने से बचें साथ ही सर्दियों में देहरादून का मौसम काफी ठंडा हो जाता है और पानी भी बहुत ठंडा रहता है, इसीलिए ठण्ड में काफी दिक्कत हो सकती है। गुच्छू पानी आने का सही समय मार्च से जून के बीच का सबसे उपयुक्त है।

कहानियों के अनुसार पूर्व में इस जगह का उपयोग लुटेरों द्वारा अंग्रेजों से छुपने के लिए किया जाता था। इस गुफा की प्राकृतिक और स्थानीय स्थिति के कारण, लुटेरों के लिए यहां छिपना सबसे आसान था। लुटेरों को यहां छुपने के लिए भूलभुलैया वाली गुफाएं एकदम उपयुक्त थी, इसीलिए यही कारण है कि इसका नाम रॉबर्स कैव यानी लुटेरों की गुफा पड़ा। यदि आप यहां अंत तक यात्रा करते हैं तो आपको इस जल के प्रारंभिक बिंदु भी मिल जाएंगे। लेकिन यहां तक पहुंचना आसान नहीं है और आपको ऊपर की ओर काफी दूरी तय करनी होती है। अंत में आपको एक छोटी नदी मिलेगी जिसका पानी गुच्चू पानी में बहता है। इस बहते पानी ने ही इस खूबसूरत गुफा को बनाया है। रॉबर्स कैव के अंत में केवल कुछ पर्यटक इस खूबसूरत गुफा की उत्पत्ति को देखने के लिए वहां जाते हैं। इस नदी का जल स्तर गर्मी के दौरान कम होता है लेकिन बारिश के मौसम में भारी मात्रा में बढ़ जाता है।

अंग्रेजों के शासनकाल में इस जगह का इस्तेमाल डाकू मान सिंह ने छिपने के लिए किया था। इस गुफा में कई रहस्यमयी खुफिया रास्ते हैं, जिस वजह से अंग्रेजी सेना भी यहां तक कभी नहीं पहुंच पाई। रॉबर्स कैव देहरादून से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, एक वक्त था जब डाकू डकैती के बाद इस जगह का इस्तेमाल अपना खजाना छिपाने के लिए करते थे। अब ना तो डाकू रहे, ना अंग्रेजों का शासन, लेकिन रॉबर्स कैव आज भी मौजूद है साथ ही मशहूर भी। यहां दूर-दूर से पर्यटक आते हैं, गुफा में झरने का पानी लगातार बहता रहता है, ये लोगों को आनंद के साथ गर्मी से राहत भी दिलाता है।

रोबर्स कैव में आज भी आपकों डाकूओं के होने के साक्ष्य मिल जाएंगे जब आप कुछ दूरी तय करते हैं तो आपको चारों और कुछ दीवारें दिखाई देती हैं। कहते हैं डाकू मान सिंह ने अपना किला यहीं बनाया था, जहां वह रहता था। पत्थरों की बनी दिवारें आज भी खड़ी हैं उन दिवारों में बंदूकों के बैरल निकालने तक की जगह बनी हुई है, जिससे किसी का हमला हो तो किले के अंदर से ही आत्मरक्षा की जा सके। लेकिन यह अब जीर्ण शीर्ण हालात में हैं। यह किला रोबर्स कैव गूच्चू पानी के बीचों बीच स्थित है। जहां पर आज कल फूड स्टोल लगे हुए हैं और पर्यटक चाय, मैगी का आनंद पानी में बैठकर लेते हैं।

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram