इज़राइल में नेतन्याहू के खिलाफ नया राजनीतिक मोर्चा, सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज
इज़राइल में आज नेतन्याहू के खिलाफ बनेगा नया राजनीतिक मोर्चा? सत्ता परिवर्तन की आहट से मचा सियासी भूचाल
इज़राइल की राजनीति में आज ऐसा बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है, जिसने पूरे देश की सियासत को गर्मा दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक नए राजनीतिक मोर्चे के ऐलान की चर्चा तेज़ है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू विरोधी दल, पूर्व प्रधानमंत्री, सुरक्षा विशेषज्ञ और कई मध्यमार्गी नेता एक साझा मंच पर आने की तैयारी में हैं। अगर यह मोर्चा औपचारिक रूप लेता है, तो इसे नेतन्याहू सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती माना जाएगा।
नेतन्याहू विरोधी खेमे में कौन-कौन शामिल?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए गठबंधन में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, विपक्षी नेता यायर लापिड और कई पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि यह मोर्चा दक्षिणपंथी राजनीति के मुकाबले एक मजबूत सेंटर-राइट और उदारवादी विकल्प पेश करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेतन्याहू के लंबे शासनकाल से असंतुष्ट मतदाताओं को एक नया विकल्प देने के लिए यह रणनीति बनाई गई है।
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जनता में क्यों बढ़ रही नाराजगी?
इज़राइल इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। गाजा युद्ध, लेबनान सीमा पर तनाव, ईरान के साथ बढ़ती टकराव की आशंका, महंगाई, आंतरिक विरोध और न्यायपालिका सुधार विवाद ने सरकार की छवि को प्रभावित किया है।
इसके अलावा नेतन्याहू पर चल रहे भ्रष्टाचार मामलों ने भी राजनीतिक संकट को और गहरा किया है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि प्रधानमंत्री निजी राजनीतिक हितों को राष्ट्रीय हित से ऊपर रख रहे हैं।
सर्वे क्या कह रहे हैं?
हालिया सर्वेक्षणों में लिकुड पार्टी अब भी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन पहले जैसी अजेय स्थिति में नहीं दिख रही। कई पोल्स में यह संकेत मिले हैं कि यदि विपक्ष एकजुट होता है, तो सत्ता परिवर्तन संभव हो सकता है। यही वजह है कि विरोधी दल बिखराव छोड़कर साझा मोर्चा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
क्या यह नेतन्याहू युग का अंत हो सकता है?
बेंजामिन नेतन्याहू इज़राइल के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने सुरक्षा, विदेश नीति और कड़े राष्ट्रवादी एजेंडे के दम पर मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है। लेकिन अब पहली बार विपक्ष “नेतन्याहू बनाम बाकी सब” मॉडल पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर नया मोर्चा नेतृत्व, सीट बंटवारे और साझा एजेंडे पर सहमति बना लेता है, तो आने वाले चुनाव बेहद दिलचस्प हो सकते हैं।
आज का ऐलान क्यों है बेहद अहम?
आज होने वाला संभावित ऐलान सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इज़राइल की सत्ता बदलने की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अगर विपक्षी चेहरे एक मंच पर नजर आते हैं, तो यह संदेश जाएगा कि देश में बदलाव की मांग तेज़ हो चुकी है।
दुनिया की नजरें अब इज़राइल पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ इतना है—क्या यह नया मोर्चा नेतन्याहू को चुनौती देगा, या फिर एक और असफल प्रयोग साबित होगा? आने वाले घंटों में तस्वीर साफ हो सकती है।
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