बोर्ड परीक्षाओं में तनाव से बचने के लिए अपनाएं ये हेल्थ टिप्स…
बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। इन परीक्षाओं से बच्चे थोड़े घबराए हुए हैं क्योंकि कोविड-19 के कारण बच्चों की क्लासेस ऑनलाइन और ऑफलाइन चलती रही। ऐसे में बच्चे पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाए। अब बच्चों को लग रहा है कि वह पूरी तरह से तैयार नहीं है और जिसके कारण ज्यादातार छात्र चिंता और तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। छात्र पढ़ें हुए विषय का याद ना रहना, घबराहट- तनाव, पेट में दर्द चक्कर और अपने बदलते हुए व्यवहार की समस्याओं को लेकर हमारे पास आते हैं।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग चिकित्सक डॉ. आशीष ने बताया कि पिछले एक माह में जिला अस्पताल की मानसिक हेल्पलाइन नंबर पर 100 से ज्यादा छात्रों की कॉल आ चुके हैं जो परीक्षा संबंधित समस्याओं से गुजर रहे हैं। ऐसा होना आम बात है बच्चों और उनके परिवार जनों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में काउंसलिंग द्वारा बच्चों को नई रहा दिखाई जाती है।
जिला अस्पताल की मनोवैज्ञानिक खुशअदा ने बताया कि बच्चों के किशोरों के लिए परीक्षा के इस तनाव को झेलना बेहद मुश्किल हो जाता है। छात्रों को बहुत सारा सिलेबस याद करना होता है, परीक्षा में आने वाले सवालों को लेकर हमेशा अनिश्चतता बनी रहती है। परिवार की बहुत सी उम्मीदों पर उन्हें खरा उतरना होता है। काउंसलिंग के दौरान बच्चे में हार्ट रेट बढ़ना, सांस लेने में परेशानी, पेशियों में खिंचाव, बहुत ज्यादा पसीना आना, दिल की धड़कन बढ़ना, पेट में मरोड़, सिर में दर्द, मुंह सूखना, मतली/पेट खराब होना, बेहोशी/चक्कर आना, बहुत ज्यादा गर्मी/ठंड लगना, नींद न आना, बुरे सपने आना, पढ़े हुए विषयों को भूलना जैसे लक्षण बताते हैं।
वहीं कुछ बच्चों व्यवहार का बदलने लगता है। वह दूसरों से बचने की कोशिश करते हैं। अधीरता महसूस करना, अपनी देखभाल कम करना, मादक पदार्थों का सेवन, अपने आप को नुकसान पहुंचाने वाला जोखिम भरा व्यवहार तक करने लगते हैं। ऐसे में बच्चों को अपने माता-पिता से ज्यादा से ज्यादा बात करनी चाहिए और माता-पिता को भी बच्चों में आए ऐसे बदलाव को समझना चाहिए। ऐसी स्थिति में एक काउंसलर से बच्चों की काउंसलिंग एक सही कदम होता है।
परीक्षा के तनाव को कैसे करें कम
खुशअदा ने बताया कि अक्सर छात्रों को यह चिंता सताती है। अगर मैं फेल हो गया तो या अगर मुझे परीक्षा में कुछ नहीं आया तो। इसके लिए अपनी पढ़ाई पर अच्छी तरह ध्यान दें। साल भर में जितना पढ़ चुके हैं उसको भी ज्यादा से ज्यादा रिवाइज करने की कोशिश करें एक टॉपिक को कम से कम 10 से 12 बार पढ़ना चाहिए ताकि वह आपके दिमाग में अच्छी तरह से बस जाए। एकदम से कुछ नया टॉपिक तैयार करने की कोशिश ना करें इससे आप ज्यादा कंफ्यूज हो जाएंगे। उन विषयों पर ध्यान दें जिनमें आपकोज्यादा मेहनत करने की जरूरत है।
टाइम टेबल बनाएं
समय के अनुसार पढ़ना शुरू करें और बीच-बीच में ब्रेक लें। टाइम टेबल के अनुसार पढ़ें। हर एक-दो घंटे बाद 15 मिनट का ब्रेक लें। इस ब्रेक में मोबाइल या टीवी देखने के बजाय आंख बंद करके लेट ना ज्यादा कारगर होगा भूख लगने पर पौष्टिक भोजन किया जा सकता है। टाइम टेबल में सोने का पूरा समय निश्चित होना चाहिए 7 से 8 घंटे की नींद बहुत जरूरी होती है इसके अलावा मेडिटेशन और आयाम भी जरूर करना चाहिए।
पौष्टिक आहार
सेहतमंद आहार तनाव से जूझने में मदद करता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रिफाइंड काबोहाइड्रेट, चीनी से युक्त स्नैक्स खाने से तनाव बढ़ता है। इसके बजाए ताजा फल और सब्जियां, अच्छी गुणवत्ता का प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड तनाव से लड़ने में मदद करते हैं। पूरे एग्जाम के दौरान पानी का बहुत ध्यान रखना चाहिए शरीर में पानी की कमी होने से आपको नींद आने की समस्या बनी रहेगी।
माता पिता जरूर ध्यान दें
मनोवैज्ञानिक खुशअदा ने बताया कि माता-पिता को बच्चों पर अपनी अपेक्षाओं का ज्यादा बोझ नहीं डालना चाहिए। हर बच्चे की अपनी-अपनी स्ट्रैंथ होती है। उसे पहचान के ही उनके लिए लक्ष्य तैयार करना चाहिए और बच्चों को अपना लक्ष्य तय करने देना चाहिए। अपना लक्ष्य तय होने के बाद तय है खुद ही उस को पूरा करने के लिए लग जाते हैं। उन्होंने बताया ज्यादातर माता-पिता की समस्या होती है कि मेरा बच्चा देर रात तक पड़ता है लेकिन सुबह उठकर नहीं पड़ता। खुश अदा ने बताया कि हर बच्चे की अपनी कैपेसिटी होती है कुछ बच्चे रात में 2:00 बजे तक तो पढ़ सकते हैं लेकिन सुबह 4:00 नहीं उठ पाते हैं। जिस वक्त बच्चे को पढ़ना अच्छा लगता है उस वक्त उसको पढ़ने देना चाहिए। अपनी मर्जी से अगर रात में भी पढ़ता है या सुबह पढ़ता है तो वह उसके ऊपर है। और वह अपनी बॉडी क्लॉक के अनुसार कार्य कर रहा है जो कि बिल्कुल सही है।
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