तेलंगाना सरकार से किसान हुए रुष्ट,धान ना बोये जाने की घोषणा से किसान परेशान ।

तेलंगाना सरकार से किसान हुए रुष्ट,धान ना बोये जाने  की घोषणा से किसान परेशान ।

तेलंगाना सरकार के एक फैसले से किसानों में काफी नाराजगी है धान की बुवाई शुरू होने से कुछ दिन पहले धान ना बोये जाने की घोषणा से किसान काफी परेशान है, वे सत्ताधारी दल के विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं.दरअसल, राज्य सरकार ने धान के बीज बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार के इस फैसले के बाद किसान परेशान हैं. उनका कहना है कि हम धान की रोपाई तो अवश्य करेंगे, क्योंकि राज्य सरकार ने इस निर्णय के बारे में हमें पहले सूचित नहीं किया था.

किसानों का कहना है कि ऐसे समय में वैकल्पिक फसलों के लिए जाना संभव नहीं है. हमने सारी व्यवस्थाएं कर ली हैं और रोपाई एक या दो सप्ताह में शुरू होने जा रही है. किसानों ने कहा कि अगर सरकार धान पर प्रतिबंध लगाना चाहती है तो उन्हें पहले से अलर्ट करना चाहिए था और कम से कम छह महीने या एक साल पहले नोटिस देना चाहिए था.

किसान जन प्रतिनिधियों से पूछ रहे हैं कि यदि वे वैकल्पिक फसलों को चुनते हैं तो उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कौन खरीदेगा, क्योंकि राज्य सरकार किसानों से सीधे एमएसपी पर केवल धान ही खरीद रही है.

किसानों की मांग है कि सरकार को एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए कि अगर वे धान के अलावा अन्य फसलों का विकल्प चुनते हैं तो वह एमएसपी पर कृषि उपज की खरीद करेगी. सरकार द्वारा इन सभी मुद्दों को स्पष्ट किए बिना अचानक धान की खेती बंद नहीं कर सकते.

तेलंगाना में किसान विशेष रूप से रबी सीजन के दौरान धान का चुनाव करने के लिए भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों का हवाला दे रहे हैं. उनका कहना है कि रबी के दौरान यहां बढ़ता तापमान केवल धान की खेती के लिए उपयुक्त है और यदि वे अन्य फसलों को चुनते हैं, तो वे जीवित नहीं रहेंगे और उन्हें भारी नुकसान होगा.
किसानों के विरोध का सामना करते हुए, मंत्री और सत्तारूढ़ दल के विधायक किसानों को आश्वासन दे रहे हैं कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के संज्ञान में लाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगले साल नवंबर से धान पर प्रतिबंध लागू हो.

तेलंगाना की के चंद्रशेखर राव सरकार ने बीते वर्षों में राज्य में धान की खेती को काफी बढ़ावा दिया है. एक समय उन्होंने राज्य को धान का कटोरा बनाने की योजना का जिक्र भी किया था. लेकिन 12 सितंबर को उन्होंने एक बयान दिया, जिसके बाद माना गया कि वे यूटर्न ले रहे हैं. तब राव ने कहा था कि धान की खेती किसानों के लिए आत्मघाती होगी, क्योंकि भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने रबी के दौरान तेलंगाना में उत्पादित उबले चावल के स्टॉक को खरीदने से इनकार कर दिया है.

मुख्यमंत्री का यह बयान यह 7 मार्च, 2020 को विधानसभा के पटल पर दिए गए उनके बयान के बिल्कुल विपरीत था, जब उन्होंने कहा था कि तेलंगाना के लोग अकेले हर साल 65 लाख टन चावल की खपत कर रहे हैं. किसान एक करोड़ टन उत्पादन करें तो भी कोई समस्या नहीं है. इसे हमारी सरकार खरीदेगी. किसान बिना किसी संदेह के धान की खेती जारी रख सकते हैं.

सीएम राव के बयान से उत्साहित किसानों ने रिकॉर्ड भूमि में धान की खेती की, जिसके बाद तेलंगाना ने उत्पादन के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. खरीफ और रबी सीजन मिलाकर एक वर्ष में तीन करोड़ टन से अधिक का उत्पादन कर 2020-21 में पंजाब के बाद तेलंगाना शीर्ष राज्य बना.
तेलंगाना से उबले हुए चावल के स्टॉक की खरीद के लिए एफसीआई के इनकार का हवाला देते हुए, राज्य सरकार ने इस महीने की शुरुआत में किसानों को धान के अलावा अन्य फसलें बोने के लिए कहा था. लेकिन सरकार को डर था कि किसान इस मुद्दे पर राज्य सरकार का साथ नहीं देंगे, इसीलिए सरकार ने बीज डीलरों से सीधे निपटना शुरू कर दिया. उन्हें धमकी दी गई कि उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे और आगामी रबी सीजन में किसानों को धान के बीज बेचने पर व्यापारियों को जेल तक हो सकती है.

पिछले हफ्ते मुख्य सचिव सोमेश कुमार ने सभी जिला कलेक्टरों के साथ बैठक की और उन्हें ‘किसी भी कीमत पर धान बीज की बिक्री को रोकने’ का निर्देश दिया. बैठक के बाद जिला कलेक्टर हरकत में आए और बीज डीलरों को बिक्री बंद करने या ‘गंभीर परिणाम भुगतने’ के निर्देश दे दिए. कार्रवाई के डर से बीज डीलरों ने बिक्री रोक दी, जिससे किसानों में कोहराम मच गया.

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  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram