मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री घोटाला: चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा समेत कुलपति और अन्य गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश की मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री घोटाले का खुलासा, चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा समेत कुलपति और 10 लोग गिरफ्तार। बाइक बोट घोटाले से जुड़े इस रैकेट का नेटवर्क बिहार समेत कई राज्यों तक फैला।
हापुड़/पिलखुआ। उत्तर प्रदेश की मोनाड यूनिवर्सिटी एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने विश्वविद्यालय में चल रहे फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने के रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए चेयरमैन चौधरी विजेंद्र सिंह हुड्डा, कुलपति एनके सिंह समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को रविवार शाम न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
एसटीएफ के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर में बीए, बीए एलएलबी, बीटेक, फार्मासिस्ट सहित कई पाठ्यक्रमों की फर्जी डिग्रियां तैयार कर 50 हजार से लेकर पांच लाख रुपये तक वसूले जा रहे थे। इस मामले में एक आरोपी संदीप कुमार उर्फ संदीप सेहरावत से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर यूनिवर्सिटी में छापेमारी की गई, जिसमें भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज – डिग्रियां, अंकपत्र, माइग्रेशन सर्टिफिकेट आदि बरामद किए गए।
एसटीएफ के अनुसार, इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड चौ. विजेंद्र सिंह हुड्डा वही शख्स है, जो 2017 के चर्चित 4300 करोड़ रुपये के बाइक बोट घोटाले में भी मुख्य आरोपी रह चुका है। हुड्डा के खिलाफ देश के विभिन्न जिलों में 100 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उस पर पहले से ही पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हो चुका था, बावजूद इसके वह लंबे समय से खुलेआम घूम रहा था।
जानकारी के अनुसार, विजेंद्र सिंह हुड्डा ने 2022 में मोनाड यूनिवर्सिटी के संचालन की कमान संभाली थी। घोटाले में संलिप्त अन्य आरोपियों में मुकेश ठाकुर, गौरव शर्मा, इमरान, अनिल बत्रा, विपुल ताल्यान, कुलदीप, सनी कश्यप और संदीप शामिल हैं।
एसटीएफ की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह बिहार के कई जिलों में सक्रिय था और हाल ही में हुई शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भी मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियों का बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य राज्यों तक इस नेटवर्क के तार जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
यह खुलासा न केवल उच्च शिक्षा की साख पर सवाल खड़े करता है, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ी गंभीर चिंता भी पैदा करता है। एजेंसियां अब इस रैकेट के अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश में जुट गई हैं।
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