तान्या ऑटोमोबाइल्स पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, एमडीए, बिजली विभाग और फायर डिपार्टमेंट भी अलर्ट मोड में
"तान्या ऑटोमोबाइल्स का अवैध खेल उजागर, एमडीए की बड़ी कार्रवाई जल्द"
मेरठ। मेरठ के छिप्पी टैंक इलाके में स्थित तान्या मोटर्स / नेक्सा शोरूम पर मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) सहित कई विभागों की नज़रें टिक गई हैं। आरोप है कि शोरूम प्रबंधन द्वारा अवैध निर्माण, बिजली चोरी और अग्निशमन नियमों का खुला उल्लंघन किया गया है। एमडीए ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जवाब नहीं मिला तो ज़ब्ती और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तय है।
अवैध निर्माण पर एमडीए सख्त
एमडीए को जनसुनवाई पोर्टल पर मिली शिकायतों के अनुसार, तान्या मोटर्स द्वारा प्लॉट संख्या 35/1-A/B/C पर बिना स्वीकृति के 200 से अधिक वर्गमीटर क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण किया गया है। इतना ही नहीं, भवन का निर्माण सेटबैक क्षेत्र पर किया गया है जिससे प्रस्तावित सार्वजनिक मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है।
एमडीए ने 19 और 25 जून को नोटिस जारी किए थे, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। इसके बाद 30 जून को अंतिम चेतावनी जारी की गई, जिसमें 1 जुलाई सुबह 11 बजे तक जवाब देने का समय दिया गया था। अब कार्रवाई किसी भी वक्त शुरू हो सकती है।
बिजली विभाग भी घेरे में
विद्युत विभाग को 15 जून को दी गई शिकायत में कहा गया है कि तान्या मोटर्स ने बिना ट्रांसफार्मर के सीधे पोल से 54 किलोवाट का कनेक्शन लिया है, जो विद्युत अधिनियम 2003 और UPERC नियमों का उल्लंघन है।
अनुमान है कि प्रति माह करीब 20 हजार यूनिट बिजली की खपत की जा रही है, जिससे अब तक करीब ₹25 लाख का राजस्व नुकसान हुआ है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते पहले की गई शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
फायर सेफ्टी नियमों की उड़ाई धज्जियां
शोरूम के पास फायर NOC नहीं है, जो किसी भी व्यावसायिक भवन के लिए अनिवार्य है। ऐसे में जनसुरक्षा को खतरा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों की मांग है कि इस भवन को तत्काल "जनसुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित" घोषित कर सील किया जाए।
SIT गठन की मांग और PIL की चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं ने शासन से MDA, PVVNL, फायर विभाग और नगर निगम के अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
साथ ही, मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड से भी अपील की गई है कि वह तान्या मोटर्स की डीलरशिप की जांच कर मान्यता पर पुनर्विचार करे। कार्रवाई न होने पर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की चेतावनी भी दी गई है।
प्रशासन की परीक्षा बना मामला
यह मामला अब शासन की पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और आमजन की सुरक्षा के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान, जनसुरक्षा संकट और भ्रष्टाचार जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई करते हुए एक मिसाल कायम करनी चाहिए।
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