मेरठ में 498 दरोगाओं ने देखी धुरंधर-2, सिनेमाघर में दिखी खाकी

मेरठ में 498 दरोगाओं ने देखी धुरंधर-2, सिनेमाघर में दिखी खाकी

498 दरोगाओं के साथ वेव सिनेमा में दिखी ‘धुरंधर-2’, हर तरफ नजर आई खाकी

 अनोखी पहल बनी चर्चा का विषय

मेरठ। यूपी में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की भूमिका को बेहतर तरीके से समझाने के उद्देश्य से एक अनोखी पहल देखने को मिली। बृहस्पतिवार को जिले के 498 दरोगा शॉप्रिक्स मॉल स्थित वेव सिनेमा पहुंचे, जहां उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर-2’ देखी। इस दौरान पूरे सिनेमा परिसर में हर तरफ खाकी वर्दी ही नजर आई, जिससे माहौल पूरी तरह पुलिसमय हो गया।

 दो शो बुक, काफिले के साथ पहुंचे पुलिसकर्मी

बताया गया कि इस खास स्क्रीनिंग के लिए वेव सिनेमा में दो शो बुक किए गए थे। निर्धारित समय पर पुलिसकर्मी सरकारी वाहनों के साथ सिनेमा पहुंचे। आम दिनों में जहां यह सिनेमा हॉल दर्शकों से भरा रहता है, वहीं इस दिन यहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई।

 फिल्म में माफिया और पुलिसिंग की कहानी

फिल्म ‘धुरंधर-2’ की बात करें तो इसमें उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था, माफिया नेटवर्क और अपराध नियंत्रण से जुड़े पहलुओं को दर्शाया गया है। फिल्म में पूर्वांचल के माफिया अतीक अहमद से मिलते-जुलते किरदार को दिखाया गया है, जिसमें उसके कथित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की कहानी भी दिखाई गई है। इसके साथ ही फिल्म में यूपी के एक पूर्व डीजीपी जैसे प्रभावशाली किरदार को भी प्रमुखता से पेश किया गया है।

 ‘सिनेमाई ट्रेनिंग’ के तौर पर देखा गया प्रयोग

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की फिल्मों के माध्यम से पुलिसकर्मियों को अपराध की प्रकृति, गैंग नेटवर्क और उससे निपटने की रणनीतियों को समझने का एक अलग नजरिया मिलता है। यही वजह है कि इस स्क्रीनिंग को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक तरह की ‘सिनेमाई ट्रेनिंग’ के रूप में देखा जा रहा है।

फिल्म देखने के बाद पुलिसकर्मियों ने भी इसे रोचक और जानकारीपूर्ण बताया। उनका कहना था कि फिल्म में दिखाए गए कई पहलू वास्तविक पुलिसिंग से जुड़े हुए लगते हैं, जिससे उन्हें अपने काम के प्रति नई समझ मिलती है।

इस पहल की पूरे शहर में चर्चा हो रही है। आम लोगों के बीच भी यह विषय बातचीत का हिस्सा बना हुआ है कि पुलिस विभाग अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नए और क्रिएटिव तरीके अपनाकर अपने जवानों को जागरूक और तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

कुल मिलाकर, वेव सिनेमा में हुआ यह आयोजन पुलिसिंग के बदलते स्वरूप और नए प्रयोगों की एक झलक पेश करता है, जिसमें सीख और मनोरंजन दोनों का संतुलन नजर आता है।

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Comments

  • S Sonu kumar Kihfv hhfv
  • J Jagdish Chandra rathore Good
  • A Ashok Sax
  • D Devendra Kumar Bsp
  • S Sri bhagwan क्या इंडिया वाले यही सब सहने के लिये पैदा हुए है नितिन गडकरी साहब , कंपनी पर ऐसा फाइन लगाओ दूसरे भी याद रखे
  • P Pankaj kumar पुलिस
  • M Manish kumar parjapity Superb
  • P Pankaj kumar Jay shri ram