मेरठ में अवैध निर्माण पर सख्ती: परिषद करेगी घर-घर सर्वे, सेटबैक नियमों के आधार पर होगी कार्रवाई
मेरठ में अवैध निर्माण पर सख्ती: परिषद करेगी घर-घर सर्वे, सेटबैक नियमों से होगा फैसला
अवैध सेंट्रल मार्केट प्रकरण के बाद प्रशासन सख्त
मेरठ में अवैध निर्माणों को लेकर नगर परिषद ने अब सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अवैध सेंट्रल मार्केट प्रकरण सामने आने के बाद परिषद ने पूरे क्षेत्र में घर-घर सर्वे कराने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर बिना तय मानकों और नक्शे के निर्माण किए गए हैं। ऐसे निर्माणों की पहचान करने के लिए सर्वे टीम गठित की जा रही है, जो रिहायशी और व्यावसायिक दोनों तरह की इमारतों की जांच करेगी।
परिषद के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अवैध निर्माणों की सूची तैयार की जा रही है और सभी मामलों में एक समान नीति के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बुलडोजर से पहले खुद हटाने का मौका
नगर परिषद ने अवैध निर्माण करने वालों से अपील की है कि वे तय समय के भीतर अपने निर्माण को स्वयं हटा लें। प्रशासन का कहना है कि यदि लोग स्वेच्छा से अवैध हिस्से नहीं हटाते हैं तो परिषद को मजबूर होकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ेगी।
बताया जा रहा है कि कुछ व्यापारी पहले ही अपने अवैध निर्माणों को हटाने लगे हैं, लेकिन कई जगह ऐसे भी मामले सामने आए हैं जहां निर्माण को छिपाने के लिए दुकानों के सामने दीवार या शटर लगाकर संरचना को ढकने की कोशिश की जा रही है। परिषद ने ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लेने की बात कही है।
रिहायशी और व्यावसायिक भवनों के लिए तय किए गए सेटबैक नियम
परिषद ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के दौरान भवनों की जांच तय सेटबैक नियमों के आधार पर की जाएगी।
रिहायशी भवनों के लिए नियम:
- 150 वर्ग मीटर तक: फ्रंट सेटबैक 1 मीटर, रियर और साइड सेटबैक आवश्यक नहीं।
- 150 से 300 वर्ग मीटर: फ्रंट 3 मीटर, रियर 1.5 मीटर।
- 300 से 500 वर्ग मीटर: फ्रंट 3 मीटर, रियर 3 मीटर।
व्यावसायिक भवनों के लिए नियम:
- 100 वर्ग मीटर तक: फ्रंट सेटबैक 1.5 मीटर।
- 100 से 300 वर्ग मीटर: फ्रंट सेटबैक 3 मीटर।
- 300 से 1000 वर्ग मीटर: फ्रंट 4.5 मीटर, रियर 3 मीटर और दोनों साइड 1.5 मीटर।
परिषद अधिकारियों का कहना है कि सर्वे में इन मानकों का पालन न करने वाले भवनों को अवैध माना जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य शहर में अवैध निर्माणों पर रोक लगाकर नियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करना है।
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