मेरठ गन्ना भवन किसान धरना 7वां दिन, 21 दिसंबर को महापंचायत, राकेश टिकैत होंगे शामिल
मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) मेरठ इकाई का गन्ना भवन पर अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन भी लगातार जारी रहा। भीषण ठंड के बावजूद सैकड़ों किसान धरना स्थल पर डटे हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। भाकियू ने ऐलान किया है कि 21 दिसंबर को गन्ना भवन परिसर में किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत शामिल होंगे।
धरने के सातवें दिन दो 75 वर्षीय बुजुर्ग किसान इंद्रपाल मलिक और जसवीर सिंह ने धरने की अध्यक्षता की। देर रात वे गन्ना भवन की तीसरी मंजिल की छत पर खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी भी उनके साथ वहीं लेट गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (शहर) आयुष विक्रम सिंह, अपर जिलाधिकारी (शहर) बृजेश सिंह, सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ सरधना आशुतोष सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मान-मनौव्वल कर सभी किसानों को सुरक्षित धरना स्थल पर नीचे लाया और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
इधर, 21 दिसंबर को होने वाली प्रशिक्षित स्नातक परीक्षा को देखते हुए प्रशासन ने लिखित पत्र जारी कर महापंचायत स्थगित करने की मांग की थी। हालांकि, भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी और किसानों ने इसे अस्वीकार कर दिया। बाद में किसानों की सहमति से महापंचायत का स्थान कमिश्नरी कार्यालय और जिला मुख्यालय से बदलकर गन्ना भवन ही तय किया गया। अब महापंचायत गन्ना भवन परिसर में ही होगी।
धरना स्थल पर आयोजित बैठक में सैकड़ों किसानों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने गन्ना विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गन्ना विभाग में आज भी अंग्रेजों के जमाने की सोच वाले अधिकारी मौजूद हैं, जो किसानों के खिलाफ पार्टीबाजी करा रहे हैं। उप गन्ना आयुक्त पर समितियों के कर्मचारियों पर दबाव बनाकर किसानों के विरोध में सांकेतिक धरने कराने का आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन रैन बसेरों की चेकिंग में लगा है, जबकि अन्नदाताओं की सुध नहीं ली जा रही।
धरना स्थल पर आज भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें मिक्स वेज, पूरी और लड्डू बनाए गए। भंडारे में किसानों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन और आमजन ने भी प्रसाद ग्रहण किया।
किसानों की प्रमुख मांगों में बिना तर्क 35 प्रतिशत बढ़ाए गए भाड़े को घटाना, घटाए गए हाड़ा को पूर्व पेराई सत्र के अनुसार लागू करना, अस्वीकृत गन्ना प्रजातियों का मूल्य बढ़ाना, गन्ना तौल केंद्रों पर हवाई दूरी के अनुसार भाड़ा तय करना, रियल टाइम खतौनी में हो रही गड़बड़ियों को दूर करना और तहसीलों में लंबित कार्यों का समयबद्ध निस्तारण शामिल है।
भाकियू ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
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