मेरठ सेंट्रल मार्केट केस: सुप्रीम कोर्ट सख्त, 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट, 1468 निर्माण पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट सख्त: 24 घंटे में मांगी अनुपालन रिपोर्ट, मेरठ सेंट्रल मार्केट के 1468 निर्माणों पर कार्रवाई का मामला
मेरठ, उत्तर प्रदेश: मेरठ सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाते हुए आवास एवं विकास परिषद उत्तर प्रदेश को फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
अदालत की सख्ती, चेयरमैन को किया तलब
सुनवाई के दौरान अदालत ने आवास एवं विकास परिषद के चेयरमैन को बुधवार सुबह 10:30 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया। विभाग की ओर से पेश अधिवक्ता ने समय बढ़ाने की कई बार मांग की, लेकिन अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आदेशों के अनुपालन में लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
1468 निर्माण ध्वस्तीकरण के दायरे में
गौरतलब है कि इससे पहले 27 जनवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका पर कड़ा फैसला सुनाते हुए छह सप्ताह के भीतर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश के दायरे में कुल 1468 ऐसे निर्माण बताए गए हैं, जो मूल रूप से आवासीय श्रेणी में आते हैं, लेकिन वर्तमान में वहां व्यावसायिक गतिविधियां जैसे शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं।
चुनाव ड्यूटी का हवाला, कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का हवाला देते हुए अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि कुछ राज्यों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के कारण अधिकारियों की ड्यूटी लगी हुई है, जिससे अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने में देरी हो रही है। इस तर्क पर अदालत ने कड़ा ऐतराज जताया।
‘अवमानना की स्थिति’, कोर्ट ने मांगा जवाब
न्यायाधीश जे. बी. पारदीवाला और के. वी. विश्वनाथ की पीठ ने पूछा कि अब तक आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए अवमानना की स्थिति करार दिया और 24 घंटे के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इस पूरे मामले पर अब मेरठ प्रशासन और आवास एवं विकास परिषद की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि समयसीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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