भारत की वो भयानक जगह जहाँ रात तो क्या दिन में जाते डरते हैं लोग
भारत : प्रकृति की गोद में हिलकोरा लेता सौन्दर्य भारत के हर कोने में नज़र आ ही जाता है हर राज्य में कोई ना कोई ऐसा स्थान अवश्य होता है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं. मगर हमारे देश में कुछ ऐसी जगहें भी है जहाँ लोगों का जाना वर्जित है, क्योंकि आप खुद उस स्थान के बारे में जान कर आप वहाँ स्वयं नही जाना चाहेगें.क्योंकि कई जगहें ऐसी होती है जो अपने आप में ही कई राज़ दफन कर के रखती है. जहाँ जाना मौत कोे दावत देना होता है. अब आप यह बात सुनकर थोङा चौंक गए होंगे कि ऐसी कौन सी जगह हो सकती है जो अपने में ही बेहद डरावनी है. हालांकि दुनिया में मानव ही एक ऐसा प्राणी है जिससे शायद सभी डरते हैं परंतु जो एक बात सबसे दिलचस्प हेै जिसे हमेशा से रहस्यओँ के बारे में जानने की इच्छा रहती हैं और उनपर से पर्दा उठाती हैँ. तो आईये बताते हैँ आपको इन्हीँ रहस्यओँ मेँ से एक रहस्य.
आपको बता देँ कि सौन्दर्य के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक जगह है, जिसका नाम है धनुषकोडी. माना जाता है कि भारत के अंतिम छोर पर ये एक ऐसी वीरान जगह है, जहां से श्रीलंका दिखाई देता है. एक समय हुआ करता था जब इस जगह पर लोग रहा करते थे, लेकिन बताया गया कि अब ये जगह पूरी तरह से वीरान हो गई है. धनुषकोडी भारत और श्रीलंका के बीच एकमात्र ऐसी स्थलीय सीमा है जो पाक जलसंधि में बालू के टीले पर सिर्फ 50 गज की लंबाई में है और यह जगह विश्व के सबसे छोटे स्थानों में से एक माना जाता है. तो वहीँ दिन के उजाले में भारी संख्या में लोग घूमने आते हैं, लेकिन अंधेरा होने से पहले ही लोग यहां से रामेश्वरम लौट जाते हैं क्योंकि धनुषकोडी से रामेश्वरम तक का पूरा 15 किलोमीटर का रास्ता हैँ जो बिल्कुल सुनसान, डरावना और रहस्यमयी है. कई लोग इस जगह को भुतीया भी मानने लगे हैं.
करीब कई साल पहले धनुषकोडी एक उभरता हुआ पर्यटन और तीर्थ स्थल था लेकिन, 1964 में आए भयानक चक्रवात में रेलवे स्टेशन, अस्पताल, चर्च, होटल और पोस्ट ऑफिस सब तबाह हो चुके थे. कहते हैं कि तब 100 से अधिक यात्रियों वाली एक रेलगाड़ी समुद्र में डूब गई थी उसके बाद से यह जगह बिल्कुल सुनसान पङा हुआ है.
मान्यताओं के अनुसार, धनुषकोडी ही वो जगह है, जहां से समुद्र के ऊपर रामसेतु का निर्माण होना शुरू हुआ था. कहते हैं कि इसी जगह पर भगवान राम ने हनुमान को एक पुल का निर्माण करने का आदेश दिया था, जिसपर से होकर वानर सेना लंका जा सके, जहां रावण ने माता सीता को हरण करके रखा था. इस जगह पर भगवान राम से संबंधित कई मंदिर मौजूद हैं.
माना जाता हैं कि रावण के भाई विभीषण के अनुरोध पर भगवान राम ने अपने धनुष के एक सिरे से सेतु को तोड़ दिया था, इसीलिए इसका नाम धनुषकोटि पड़ा था. धनुष का मतलब तो आप जानते ही हैं और कोटि का मतलब होता है सिरा. तो आपको हमारी यह वायरल खबर कैसी लगी हमेँ कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.
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