शास्त्री नगर में सेटबैक विवाद: क्या 100 गज से छोटे प्लॉट पर नियम अलग थे?
शास्त्री नगर में सेटबैक विवाद: पुराने नियम बनाम नए आदेश, क्या कहते हैं 1980 के प्रावधान?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा भ्रम, पुराने आवंटियों में असमंजस
मेरठ के शास्त्री नगर क्षेत्र में इन दिनों आवासीय भवनों में सेटबैक (खाली जगह) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर उन निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है, जिनमें सेटबैक छोड़े बिना निर्माण किया गया है।
हालांकि, कॉलोनी के कई पुराने आवंटी यह तर्क दे रहे हैं कि जब यह योजना 1980 के दशक में लागू हुई थी, तब छोटे प्लॉट—खासतौर पर 100 गज से कम—पर सेटबैक अनिवार्य नहीं था। ऐसे में अब नए नियमों के आधार पर कार्रवाई करना उचित है या नहीं, यही बड़ा सवाल बन गया है।
1980 के समय क्या थे नियम?
LIG श्रेणी के प्लॉट पर अलग व्यवस्था
शास्त्री नगर योजना, जिसे उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने विकसित किया था, उस समय Low Income Group (LIG) आवास के लिए विशेष प्रावधान लागू थे।
इन योजनाओं पर UP Awas Vikas Parishad Regulations 1982 के साथ-साथ IS 8888 (Low Income Housing Standard) लागू माना जाता था।
छोटे प्लॉट पर सेटबैक की बाध्यता नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार:
- 80 से 100 गज के प्लॉट पर
- साइड सेटबैक कई मामलों में शून्य (Zero) था
- पीछे (rear) सेटबैक भी अनिवार्य नहीं रखा गया
- आगे (front) केवल प्रतीकात्मक या न्यूनतम जगह छोड़ी जाती थी
योजनाओं में अधिकतर मकान रो-हाउस (जुड़े हुए निर्माण) के रूप में डिजाइन किए गए थे, जहां व्यक्तिगत सेटबैक की जगह सामूहिक खुला स्थान (roads, lanes) पर्याप्त माना गया।
Layout Plan ही था मुख्य आधार
व्यक्तिगत नियम से ज्यादा महत्वपूर्ण थी योजना की स्वीकृति
उस समय:
- हर सेक्टर/ब्लॉक का approved layout plan
- और type design (निर्माण का तय नक्शा)
यही असली नियम माने जाते थे
यानी यदि किसी प्लॉट का डिजाइन ही ऐसा था जिसमें साइड या पीछे जगह नहीं छोड़ी जानी थी, तो वह वैध निर्माण माना जाता था।
अब क्यों हो रहा विवाद?
नए नियम बनाम पुराने अधिकार
वर्तमान में:
- शहरों में मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज सख्त हो चुके हैं
- सेटबैक को अनिवार्य माना जा रहा है
लेकिन समस्या यह है कि:
शास्त्री नगर जैसी पुरानी योजनाओं में मकान पुराने नियमों के तहत बने थे
ऐसे में सवाल उठता है कि:
- क्या नए नियमों को पूर्व प्रभाव (retrospective) से लागू किया जा सकता है?
- या फिर पुराने आवंटियों को उनके समय के नियमों के अनुसार ही देखा जाना चाहिए?
कानूनी स्थिति क्या कहती है?
पुराने आवंटन पर नए नियम सीधे लागू नहीं होते
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार:
- यदि मकान मूल allotment, layout और उस समय के नियमों के अनुसार बना है
तो बाद के नियम स्वतः लागू नहीं होते
हालांकि:
- यदि बाद में अतिरिक्त/अवैध निर्माण किया गया है
तो उस हिस्से पर कार्रवाई संभव है
स्थानीय लोगों की मांग
स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत
शास्त्री नगर के निवासियों का कहना है कि:
- प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि
- 1980 की योजना में किन प्लॉट्स पर सेटबैक अनिवार्य था
- और किन पर नहीं
ताकि:
- पुराने वैध निर्माण को अवैध न माना जाए
- और वास्तविक अतिक्रमण पर ही कार्रवाई हो
समाधान क्या हो सकता है?
शास्त्री नगर का यह विवाद केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की पुरानी आवासीय योजनाओं से जुड़ा मुद्दा बन सकता है।
समाधान के लिए जरूरी है:
- पुराने layout plans और allotment conditions का सत्यापन
- और उसी आधार पर कार्रवाई
ताकि:
- कानून का पालन भी हो
- और पुराने आवंटियों के अधिकार भी सुरक्षित रहें
Bhartiyavani.com ( भारतीय वाणी ) एक राष्ट्रीय हिन्दी न्यूज़ वेबसाइट है। यह 2019 में स्थापित हुई और इस न्यूज़ वेबसाइट के माध्यम से हम सभी ताजा खबरें और समाज से जुड़े सभी पहलुओं को आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयत्न करते है।
हमारी वेबसाइट एक रजिस्टर्ड वेबसाइट है जो कि भारत सरकार द्वारा MSME (ministry of micro small and medium enterprises) से सर्टिफाइड है।
लगभग 1 करोड़ से अधिक व्यूज के साथ लगभग २० लाख से अधिक दर्शक हमारे साथ जुड़ चुके है
अपने किसी भी सुझाव के लिए आप हमारी ईमेल आईड bhartiyawani@gmail.com पर संपर्क कर सकते है या फिर हमारे व्हाट्सअप नंबर 8979456781 पर संपर्क कर सकते है


















































Write a Review