एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल, बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड मिलने का दावा
एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल, लैब रिपोर्ट में बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड्स मिलने का दावा
भारत के लोकप्रिय मसाला ब्रांड Everest के चार उत्पादों को लेकर एक रिपोर्ट के बाद चर्चा तेज हो गई है। एक यूट्यूब चैनल Trustified द्वारा कराए गए लैब परीक्षण में कंपनी के चार मसालों को सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं बताया गया है। जिन मसालों के सैंपल की जांच की गई उनमें एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट किचन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरीलाल चिली पाउडर और एवरेस्ट मीट मसाला शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार इन मसालों के सैंपल बाजार से खरीदकर लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में इन उत्पादों में एंटेरोबैक्टीरियेसी (Enterobacteriaceae) नामक बैक्टीरिया तय सीमा से अधिक मात्रा में पाया गया। इसके अलावा कुछ मसालों में कीटनाशकों (पेस्टिसाइड्स) के अवशेष भी निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने का दावा किया गया है।
किन मसालों में क्या मिला
लैब रिपोर्ट के मुताबिक एवरेस्ट गरम मसाला में दो पेस्टिसाइड—एसिटामिप्रिड और एज़ोक्सीस्ट्रोबिन तय सीमा से ज्यादा पाए गए। इसके साथ ही इसमें एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया भी अधिक मात्रा में मिला।
वहीं एवरेस्ट किचन किंग मसाला में भी यही बैक्टीरिया अधिक पाया गया और तीन पेस्टिसाइड—थियामेथॉक्सम, कार्बेन्डाज़िम/बेनोमिल और कार्बेन्डाज़िम की मात्रा अधिक बताई गई।
एवरेस्ट कश्मीरीलाल चिली पाउडर में पेस्टिसाइड की मात्रा तो सीमित पाई गई, लेकिन इसमें भी एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया निर्धारित सीमा से ज्यादा मौजूद बताया गया।
इसके अलावा एवरेस्ट मीट मसाला में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया के साथ चार पेस्टिसाइड—एथियन, टेबुकोनाज़ोल, एज़ोक्सीस्ट्रोबिन और फ्लूओपायरम की मात्रा अधिक होने का दावा किया गया।
स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया की एक बड़ी श्रेणी है, जिसमें ई.कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया शामिल होते हैं। यदि किसी खाद्य पदार्थ में इसकी मात्रा अधिक हो और उसे लंबे समय तक खाया जाए तो इससे दस्त, उल्टी, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
वहीं पेस्टिसाइड्स की अधिक मात्रा शरीर में लगातार पहुंचने पर लिवर, आंतों और नर्वस सिस्टम पर भी असर डाल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मसाले आमतौर पर बहुत कम मात्रा में खाए जाते हैं, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इससे गंभीर खतरे की संभावना कम होती है। फिर भी उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि मसाले विश्वसनीय स्रोत से खरीदें, उन्हें सही तरीके से स्टोर करें और खाने को अच्छी तरह पकाकर ही इस्तेमाल करें।
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